नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जन्मसिद्ध नागरिकता के मुद्दे पर बड़ा कानूनी झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से उस प्रयास को अस्वीकार कर दिया, जिसके तहत अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे या अस्थायी वीजा पर मौजूद माता-पिता के बच्चों की नागरिकता सीमित करने की योजना बनाई गई थी. अदालत ने साफ किया कि अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन ऐसे बच्चों को भी जन्म से नागरिकता प्रदान करता है.
ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में एक कार्यकारी आदेश जारी कर जन्मसिद्ध नागरिकता के नियमों में बदलाव की कोशिश की थी. इस आदेश में कहा गया था कि अवैध प्रवासियों और अस्थायी वीजा धारकों के अमेरिका में जन्मे बच्चों को स्वतः नागरिकता नहीं दी जानी चाहिए. हालांकि निचली अदालतों ने इस आदेश पर पहले ही रोक लगा दी थी.
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला पढ़ते हुए कहा कि अमेरिका में जन्मे ऐसे बच्चे देश के अधिकार क्षेत्र के अधीन आते हैं. इसलिए उन्हें 14वें संशोधन के तहत नागरिकता का पूरा अधिकार प्राप्त है. अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान की यह व्यवस्था लंबे समय से लागू है और इसे सीमित करने का कोई आधार नहीं बनता.
सुनवाई के दौरान अदालत ने 1898 के ऐतिहासिक वोंग किम आर्क मामले का उल्लेख किया. उस फैसले में भी अमेरिका में जन्मे एक बच्चे को नागरिक माना गया था, भले ही उसके माता-पिता विदेशी मूल के थे. अदालत ने कहा कि यह कानूनी सिद्धांत आज भी प्रभावी है.
यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए हाल के दिनों में एक और बड़ी कानूनी हार माना जा रहा है. इससे पहले उनके वैश्विक टैरिफ से जुड़े कदमों और फेडरल रिजर्व गवर्नर लिसा कुक को हटाने की कोशिशों को भी अदालतों से राहत नहीं मिली थी. ताजा फैसले ने जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर चल रही बहस को फिर केंद्र में ला दिया है.