अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ नीति को झटका दिया है. अदालत ने शुक्रवार को 6-3 के बहुमत से इस आदेश को पारित किया. हालांकि अदालत ने इसके लिए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी IEEPA का तर्क दिया है.
ट्रंप के टैरिफ से ना केवल भारत बल्कि पूरे दुनिया के व्यापार जगत में उथल-पुथल मची थी. टैरिफ से राहत के लिए लगातार कई देश बैठक भी कर रहे थे. ऐसे में अमेरिका के ही संविधान में लिखे कानून ने पूरे दुनिया को राहत दी है. तो ऐसे में हमें इसके बारे में जानना जरूरी है.
IEEPA यानी इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट की बात करें तो यह 1977 में अस्तित्व में आया एक संघीय कानून है. पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर के कार्यकाल के दौरान इस कानून पारित किया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में विदेशी खतरों से निपटने के लिए आर्थिक लेन-देन को विनियमित करने की शक्ति देना था. यह कानून 1917 के ट्रेडिंग विद द एनिमी एक्ट के कुछ हिस्सों को प्रतिस्थापित करने के लिए बनाया गया था.
1970 के दशक में वाटरगेट कांड के बाद कांग्रेस ने राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों पर सख्त सीमाएं तय करने का प्रयास किया था. IEEPA इसी संदर्भ में आया, जो राष्ट्रपति को असाधारण और विदेशी मूल के खतरों से निपटने के लिए संपत्ति फ्रीज करने, वित्तीय लेन-देन प्रतिबंधित करने, व्यापार और निवेश पर रोक लगाने जैसे कदम उठाने की अनुमति देता है.
अमेरिकी संविधान के मुताबिक यह कानून तभी लागू होता है जब राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करते हैं. साथ ही यह साबित करें कि खतरा राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति या अर्थव्यवस्था से जुड़ा हो तथा विदेशी स्रोत से उत्पन्न हुआ हो. कानून के मुताबिक ऐसे मामलों में राष्ट्रपति कार्यकारी आदेश जारी कर अमेरिकी वित्त विभाग के माध्यम से प्रतिबंध लागू कर सकते हैं. इसमें विदेशी संपत्तियां जब्त करना, मुद्रा हस्तांतरण रोकना या कंपनियों/सरकारों पर प्रतिबंध शामिल हैं. इस कानून पर प्रकाश डालते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब स्पष्ट किया है कि यह कानून टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं देता है.
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत की राय में लिखा कि IEEPA राष्ट्रपति को असीमित टैरिफ लगाने की असाधारण शक्ति नहीं प्रदान करता है. अदालत ने साफ कहा कि IEEPA आपातकालीन प्रतिबंधों के लिए है, न कि सामान्य व्यापार नीति या टैक्सेशन के लिए लाया गया कानून है. जजों की बेंच ने कहा कि यह एक इमरजेंसी बैन एक्ट है, खुली टैरिफ नीति लागू करने का माध्यम नहीं बन सकता है. अदालत के इसी फैसले से ट्रंप की लिबरेशन डे टैरिफ और अन्य आपातकालीन शुल्क को खत्म क