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क्या फिर आने वाली है महामारी? अमेरिका में बढ़ा इबोला का खतरा, हवाई अड्डों पर मची खलबली

अमेरिका ने इबोला संक्रमण को रोकने के लिए हवाई अड्डों पर कड़ी स्क्रीनिंग शुरू कर दी है. DRC, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है.

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Ashutosh Rai

अफ्रीकी देशों में तेजी से फैल रहे इबोला ने दुनिया के कई देशों की चिंता बढ़ा दी है. इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिका ने अपने हवाई अड्डों पर विशेष स्वास्थ्य जांच और यात्रा प्रतिबंध लागू कर दिए हैं. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो, दक्षिण सूडान और युगांडा से आने वाले यात्रियों की अब सख्त स्क्रीनिंग की जा रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी के बाद अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं और संक्रमण को देश में प्रवेश करने से रोकने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं.

एयरपोर्ट पर बढ़ी निगरानी-नए नियम

अमेरिका ने इबोला के बढ़ते खतरे को देखते हुए वाशिंगटन-डलेस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विशेष स्क्रीनिंग व्यवस्था लागू की है. अब वे अमेरिकी नागरिक और ग्रीन कार्ड धारक, पिछले 21 दिनों में DRC, युगांडा या दक्षिण सूडान में रहे हैं, उन्हें इसी एयरपोर्ट के जरिए प्रवेश करना होगा. स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम यात्रियों की मेडिकल हिस्ट्री, शरीर का तापमान और लक्षणों की जांच कर रही है. वहीं विदेशी नागरिकों के लिए फिलहाल अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है. यह प्रतिबंध शुरुआती तौर पर 30 दिनों तक लागू रहेगा. अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि फिलहाल देश के भीतर संक्रमण का खतरा कम है लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है.

WHO की चेतावनी से बढ़ी चिंता

संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, DRC में इबोला के 600 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं. अब तक 148 लोगों की मौत हो चुकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण अप्रैल की शुरुआत से ही फैलना शुरू हो गया था लेकिन इसकी पुष्टि बाद में हुई. यही वजह है कि कई देशों ने अपनी सीमाओं पर स्वास्थ्य जांच को और कड़ा कर दिया है. WHO के अधिकारियों ने साफ कहा है कि यह वायरस बेहद तेजी से फैल सकता है. अफ्रीका के कई ग्रामीण इलाकों में अभी भी जागरूकता और इलाज की भारी कमी बनी हुई है.

अफ्रीका में हालात संभालने की चुनौती

इबोला प्रभावित इलाकों में हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं. इटुरी प्रांत में एक उपचार केंद्र को गुस्साए लोगों ने आग के हवाले कर दिया. अधिकारियों ने संक्रमण के डर से शव परिवार को नहीं सौंपा था. स्थानीय परंपराओं और स्वास्थ्य नियमों के बीच टकराव ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया है. विशेषज्ञ लगातार लोगों को जागरूक करने, संक्रमितों को अलग रखने और संक्रमण की कड़ियों की पहचान करने में जुटे हैं. मौजूदा बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई प्रभावी वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है.