menu-icon
India Daily

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पंजाब में आवारा कुत्तों पर सख्त एक्शन, खतरनाक डॉग्स को इच्छामृत्यु की मंजूरी!

पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सार्वजनिक जगहों से खतरनाक, बीमार और आक्रामक आवारा कुत्तों को हटाने और जरूरत पड़ने पर उन्हें कानूनन इच्छामृत्यु (यूथनेशिया) देने का अभियान शुरू किया है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पंजाब में आवारा कुत्तों पर सख्त एक्शन, खतरनाक डॉग्स को इच्छामृत्यु की मंजूरी!
Courtesy: ai generated

सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े आदेश के बाद पंजाब सरकार ने सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने का अभियान शुरू कर दिया है. अदालत ने इंसानी जान को खतरे से बचाने के लिए उन आवारा कुत्तों को यूथनेशिया देने की अनुमति दे दी है जो पागल हैं और लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं या फिर बेहद खतरनाक साबित हो चुके हैं.

पंजाब में हटाए जाएंगे आवारा कुत्ते

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार भारी भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का काम करेगी. उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इंसानी जान के लिए खतरा बन चुके खतरनाक और आक्रामक कुत्तों के खिलाफ 'कानूनी रूप से मान्य तरीकों जिसमें यूथनेशिया भी शामिल है का इस्तेमाल किया जाएगा.

यह पहली बार है जब देश की सबसे बड़ी अदालत ने आवारा कुत्तों को यूथनेशिया देने की इजाजत दी है. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने देश भर में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी और उनके हमलों से निपटने के लिए कई निर्देश जारी किए हैं.

पंजाब सरकार की मुहिम

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उनकी सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पूरी तरह लागू करेगी. भारी भीड़भाड़ वाली जगहों से आवारा कुत्तों को हटाया जाएगा 'ताकि बच्चे, बुजुर्ग और परिवार बिना किसी डर के सुरक्षित घूम सकें.' उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पर्याप्त संख्या में डॉग शेल्टर्स बनाएगी जहां इन कुत्तों की सही देखभाल हो सके. सीएम ने साफ किया कि बीमार या पागल कुत्तों को यूथनेशिया देने का काम 'प्रिवेंशन ऑफ क्रूएलिटी टू एनिमल्स एक्ट' और 'एबीसी नियमों' के तहत ही किया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सम्मान के साथ जीने के अधिकार में बिना किसी डर के आजादी से घूमने का अधिकार भी शामिल है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब इंसानों की सुरक्षा और जिंदगी की तुलना पशु कल्याण से की जाएगी तो संवैधानिक संतुलन हमेशा इंसानी जान को बचाने के पक्ष में झुकेगा.

यह मामला पिछले साल जुलाई में अखबारों की उन खबरों के बाद शुरू हुआ था जिनमें बच्चों पर आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज के मामलों का जिक्र था. इस फैसले के बाद भारत भी अब अमेरिका, जापान, रूस और तुर्की जैसे देशों की कतार में शामिल हो गया है जहां खतरनाक या लाइलाज आवारा जानवरों को कानूनन इच्छामृत्यु देने का प्रावधान है.