शुक्रवार को अजमेर शरीफ दरगाह से जुड़े मौलवी सैयद सरवर चिश्ती के एक बयान ने देशभर में बहस छेड़ दी. मौलवी ने केंद्र सरकार से मांग की कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए और देशभर में उसकी हत्या, कुर्बानी के लिए बिक्री और बीफ निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाई जाए. चिश्ती ने कहा कि गाय सिर्फ धार्मिक आस्था का विषय नहीं है. यह भारतीय संस्कृति और सामाजिक संवेदनशीलता से जुड़ा मुद्दा है.
सैयद सरवर चिश्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद का विशेष सत्र बुलाने की अपील की. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब गाय को संवैधानिक सुरक्षा दी जाए. हिंदू समाज में गाय को मां का दर्जा प्राप्त है. करोड़ों लोगों की आस्था उससे जुड़ी हुई है. चिश्ती ने यह भी कहा कि इस विषय को राजनीतिक चश्मे से देखने की जगह सांस्कृतिक और सामाजिक सम्मान के नजरिए से देखा जाना चाहिए. उनके कहना है कि अगर सरकार इस दिशा में कदम उठाती है तो देश का बड़ा मुस्लिम वर्ग भी इसका स्वागत करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि संसद में ऐसे कानून पर कौन समर्थन करता है और कौन विरोध, यह देश के सामने साफ होना चाहिए.
चिश्ती ने सड़कों पर घूम रही लावारिस गायों का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि कई लोग गाय से दूध लेना बंद होने के बाद उन्हें बेसहारा छोड़ देते हैं. ये जानवर शहरों और गांवों की सड़कों पर प्लास्टिक और कचरा खाने को मजबूर हो जाते हैं. उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कानून बनाए जाएं, जो गायों को छोड़ देते हैं. चिश्ती ने कहा कि सिर्फ धार्मिक बातें करने से समस्या का समाधान नहीं होगा. जमीनी स्तर पर पशुओं की सुरक्षा और देखभाल के लिए ठोस कदम उठाने होंगे.
मौलवी सैयद सरवर चिश्ती ने गोहत्या के शक में होने वाली मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ हिंसा या कानून हाथ में लेना गलत है. ऐसी घटनाएं समाज में डर और नफरत का माहौल पैदा करती हैं. इसके साथ ही उन्होंने पूरे देश में बीफ निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की. चिश्ती का कहना था कि अगर गाय को लेकर भावनाएं इतनी गहरी हैं तो सरकार को इस दिशा में स्पष्ट और सख्त नीति बनानी चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए.
अपने बयान में चिश्ती ने भारतीय जनता पार्टी पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि केंद्र में लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद सरकार ने अब तक ऐसा कोई राष्ट्रीय कानून नहीं बनाया, जिससे गोहत्या और बीफ़ व्यापार पर एक समान रोक लग सके. अगर सरकार वास्तव में इस मुद्दे को गंभीरता से लेती है, तो उसे पूरे देश के लिए एक स्पष्ट कानून लाना चाहिए. चिश्ती ने कहा कि गाय का सम्मान सिर्फ चुनावी मुद्दा नहीं होना चाहिए.