पूरे विश्व में इस समय अनिश्चितता का माहौल है. सुपर पॉवर कहे जाने वाले दो देश अमेरिका और चीन के एक्शन बाकी देशों को समझ नहीं आ रहा. एक ओर अमेरिका की ओर से ईरान के मामले में चीन को चेतावनी दी जा रही है. वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की तैयारी कर रहे हैं.
अमेरिका और चीन दोनों ऐसे देश हैं, जो सुपर पॉवर तो हैं लेकिन इन पर किसी भी देश को भरोसा नहीं है. एशिया और मिडिल ईस्ट के कई देश जो इनपर कहीं न कहीं निर्भर करते हैं, उन्होंने अपनी तैयारी अब खुद ही शुरू कर दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति 9 साल बाद 13-15 मई 2026 को चीन जा रहे हैं. हालांकि उससे पहले मिडिल ईस्ट में काफी उथल-पुथल देखने को मिल रहा है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक छोटे और मजबूत देशों ने अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठा ली है. पोलैंड जल्द ही साउथ कोरियाई टैंकों के लिए प्रोडक्शन लाइनें शुरू करने जा रहा है. वहीं ऑस्ट्रेलिया जापान से वॉर शिप यानी युद्धपोत खरीदने के तैयारी कर रहा है. जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान एक दूसरे के दुश्मन नजर आ रहे कनाडा और भारत के बीच अब रिश्ते सही हो रहे हैं. दोनों देशों ने भी डील की है, जिसके मुताबिक कनाडा भारत को यूरेनियम भेजेगा और भारत वियतनाम को क्रूज मिसाइलें सौंपने की तैयारी में है. वहीं ब्राजील अब UAE यानी संयुक्त अरब अमीरात के लिए मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान बनाने की तैयारी कर रहा है. ये सभी सौदे कुछ हफ्तों के अंदर फाइनल किए गए हैं. जिससे यह साफ होता है कि ये देश अपनी सुरक्षा की तैयारी खुद कर रहे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो, अक्सर अपने बयानों को बदलते रहते हैं और चीन जिसने हमेशा सुमड़ी के अंदर से ही फैसले लिया है, इन दोनों देशों पर दुनिया को कम भरोसा है. ये दोनों देश हमेशा से दूसरे देशों को अपनी बातों पर राजी करने के लिए मजबूर करते रहे हैं. जिसका सबसे ताजा उदाहरण ईरान भी है. ऐसे में कोई भी देश रिस्क लेना नहीं चाहता.
इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद हो जाने के कारण पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. ऐसे में छोटे लेकिन मजबूत देशों ने चुपचाप एक दूसरे की मदद करते हुए आगे बढ़ने का फैसला लिया है. सिंगापुर के सुरक्षा विश्लेषक जा इयान चोंग का मानना है कि कोई भी देश इन महाशक्तियों से लड़ने के मूड में नहीं है.