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टिकटॉक को लेकर अमेरिका-चीन में समझौता, शी जीनपिंग से बातचीत के बाद होगा बड़ा ऐलान, ट्रंप ने किया दावा

ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका और चीन के बीच टिकटॉक को लेकर डील फाइनल हो गई है, जिसे वह शी जिनपिंग से बात कर औपचारिक रूप देंगे. उन्होंने इसे दोनों देशों के लिए फायदेमंद और अब तक का सबसे अलग समझौता बताया

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
टिकटॉक को लेकर अमेरिका-चीन में समझौता, शी जीनपिंग से बातचीत के बाद होगा बड़ा ऐलान, ट्रंप ने किया दावा
Courtesy: social media - x

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि अमेरिका और चीन के बीच टिकटॉक को लेकर समझौता हो गया है. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने चीन के साथ डील फाइनल कर ली है और शुक्रवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत कर इसे औपचारिक रूप देंगे. उन्होंने इसे अब तक का सबसे अच्छा व्यापार समझौता करार दिया और कहा कि यह दोनों देशों के लिए लाभदायक साबित होगा.

ट्रंप ने यह भी कहा कि यह सौदा पहले हुए समझौतों से बिल्कुल अलग है और इसमें कई बड़ी अमेरिकी कंपनियां टिकटॉक को खरीदने में रुचि दिखा रही हैं. उनके इस बयान के बाद यह माना जा रहा है कि अमेरिका में टिकटॉक पर लगे बैन की आशंका अब टल सकती है और यह ऐप जल्द ही नए मालिक के साथ फिर से मजबूती से बाजार में बना रहेगा.

पहले दोनों देशों के बीच हो चुकी है बातचीत

गौरतलब है कि अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक तनाव के बीच मैड्रिड में दोनों देशों के बीच बात-चीत हुई थी. इस वार्ता को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आशावादी रुख दिखाया था. उन्होंने कहा था कि बैठक काफी अच्छी रही और जल्द ही इसका निष्कर्ष सामने आएगा. ट्रंप ने अपने बयान में टिकटॉक को लेकर भी पहले ही एक संकेत दिया था.

ट्रंप टैरिफ विवाद और टिकटॉक

अमेरिका और चाइना के बीच व्यापार संबंध इस साल बेहद तनावपूर्ण रहे हैं. दोनों ही देशों ने एक-दूसरे के सामान पर भारी टैरिफ लगाए हैं जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. हालांकि दोनों ने ही टैरिफ को अस्थायी तौर पर घटाकर कम किया है.

वहीं अगस्त में हुई एक नई डील के तहत ये टैरिफ 90 दिनों तक स्थगित किए गए हैं. यानी 10 नवंबर तक टैरिफ से राहत बनी रहेगी. इसी बीच टिकटॉक का भविष्य सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है. अमेरिका की ट्रंप सरकार ने 17 सितंबर तक का समय दिया था कि टिकटॉक किसी गैर-चीनी कंपनी को बेचा जाए. हांलाकि यह समय सीमा पहले ही तीन बार बढ़ाई जा चुकी है.