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India Daily

होर्मुज की लहरों पर अमेरिका का 'ऑपरेशन', तेल मार्ग को बचाने के लिए समंदर में उतारे रोबोटिक ड्रोन

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए हाईटेक अभियान शुरू किया है. रोबोटिक ड्रोन और लेजर हेलिकॉप्टरों की मदद से 800 फंसे हुए जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार किया जा रहा है ताकि वैश्विक व्यापार बहाल हो सके.

KanhaiyaaZee
होर्मुज की लहरों पर अमेरिका का 'ऑपरेशन', तेल मार्ग को बचाने के लिए समंदर में उतारे रोबोटिक ड्रोन
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया के अशांत समंदर में वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित करने के लिए अमेरिका ने मोर्चा संभाल लिया है. ईरान की आईआरजीसी द्वारा बिछाई गई संभावित बारूदी सुरंगों के खतरे को देखते हुए अमेरिकी नौसेना ने अत्याधुनिक युद्धपोत और मानवरहित तकनीकों को तैनात किया है. इस मिशन का मुख्य उद्देश्य उन 800 से अधिक तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों के लिए सुरक्षित गलियारा बनाना है, जो पिछले कई दिनों से यहां फंसे हुए हैं. यह ऑपरेशन पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से गुजरने वाले कच्चे तेल पर वैश्विक बाजार निर्भर करता है.

अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने इस ऑपरेशन के लिए दो गाइडेड मिसाइल विध्वंसक युद्धपोतों को तैनात किया है. ये युद्धपोत केवल सुरंगें ही नहीं हटा रहे, बल्कि सुरक्षा कवच भी प्रदान कर रहे हैं. इनमें लगे आधुनिक 'एजिस कॉम्बैट सिस्टम' और इंटरसेप्टर मिसाइलें किसी भी हवाई या समुद्री हमले को रोकने में सक्षम हैं. एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, एक नया सुरक्षित समुद्री रास्ता तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही जहाजों के लिए खोला जाएगा ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार फिर से सामान्य हो सके.

रोबोटिक ड्रोन और लेजर हंटिंग तकनीक 

समंदर की गहराई में छिपी सुरंगों का पता लगाने के लिए अमेरिका सीधे अपने मुख्य जहाजों को खतरे में नहीं डाल रहा है. इसके बजाय, पानी के अंदर चलने वाले रोबोटिक ड्रोन यानी 'यूयूवी' (अनमैन्ड अंडरवाटर व्हीकल) का इस्तेमाल किया जा रहा है. ये ड्रोन टॉरपीडो के आकार के होते हैं और अपने आप समंदर में घूमकर हाईटेक सोनार तकनीक से सतह का नक्शा बनाते हैं. वहीं, आसमान से 'एमएच-60एस' हेलिकॉप्टर खास लेजर सिस्टम (एएलएमडीएस) की मदद से पानी के नीचे मौजूद सुरंगों की सटीक पहचान कर रहे हैं.

विनाशक प्रहार: कैसे खत्म होती हैं सुरंगें? 

अमेरिकी सेना के इस अभियान में जब किसी सुरंग का पता चलता है, तो उसे नष्ट करने के लिए एक अन्य रिमोट कंट्रोल सिस्टम (एएमएनएस) का उपयोग किया जाता है. यह छोटा रोबोट सुरंग के बेहद करीब जाकर विस्फोट के जरिए उसे सुरक्षित रूप से खत्म कर देता है. अधिकारियों का कहना है कि ये सुरंगें ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़ी हो सकती हैं. ये गुप्त हथियार बड़े जहाजों और भारी तेल टैंकरों के लिए एक गंभीर खतरा बनकर उभरे हैं.

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता संकट 

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है, जहां से वैश्विक आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है. हालिया संघर्ष के चलते यहां करीब 800 जहाज फंसे हुए हैं, जिसके कारण आपूर्ति बाधित हुई है. इस रास्ते में आई रुकावट की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. ईरान द्वारा रास्ता बाधित किए जाने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं, जिससे पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट का डर बढ़ गया है.

सुरक्षित व्यापार की बहाली की चुनौती 

अमेरिकी नौसेना का यह अभियान केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को डूबने से बचाने की एक कोशिश है. एडमिरल कूपर ने आश्वासन दिया है कि सुरक्षा एजेंसियां दिन-रात काम कर रही हैं ताकि समुद्री रास्ते को पूरी तरह साफ किया जा सके. फंसे हुए जहाजों के मालिकों और वैश्विक कंपनियों की निगाहें अब सेंटकॉम के इस मिशन पर टिकी हैं. इस रास्ते का सुरक्षित होना न केवल तेल की कीमतों को स्थिर करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी एक नया मोड़ लाएगा.