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India Daily

ट्रंप-वेंस और ईरानी स्पीकर ने समझौते पर किए डिजिटल हस्ताक्षर, 3 महीने से जारी युद्ध पर लगा ब्रेक!

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. दोनों पक्षों ने शांति समझौते की रूपरेखा पर सहमति जताई है. होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही भी फिर शुरू हो गई है.

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ट्रंप-वेंस और ईरानी स्पीकर ने समझौते पर किए डिजिटल हस्ताक्षर, 3 महीने से जारी युद्ध पर लगा ब्रेक!
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में कई महीनों से जारी तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक प्रगति सामने आई है. अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अमेरिका और ईरान ने संघर्ष समाप्त करने के लिए एक प्रारंभिक समझौते पर सहमति बनाई है. इस समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी गालीबाफ ने इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर किए हैं.

अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. अधिकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यक्तिगत रूप से दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की. उनके साथ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी गालीबाफ ने भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से इस रूपरेखा समझौते को स्वीकार किया.

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी गतिविधियां

समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है. अधिकारियों का कहना है कि जहाजों की आवाजाही पहले ही शुरू हो चुकी है और आने वाले दिनों में इसमें लगातार वृद्धि देखने को मिलेगी. यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके खुलने से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है.

सामान्य स्थिति बहाल होने में लगेगा समय

अमेरिकी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि हालात पूरी तरह सामान्य होने में कुछ समय लगेगा. उनका कहना है कि अगले दो सप्ताह में पूर्ण बहाली संभव नहीं है, लेकिन मौजूदा संकेत सकारात्मक हैं. समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के क्षेत्र में सुधार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे वैश्विक बाजारों को भरोसा मिला है.

फरवरी में शुरू हुआ था संघर्ष

यह संघर्ष उस समय शुरू हुआ था जब फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले हुए थे. इसके बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता गया और कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई. संघर्ष के कारण तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ी और हजारों लोगों की जान जाने की खबरें भी सामने आईं. ऐसे में यह समझौता तनाव कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

बाजारों और ऊर्जा क्षेत्र को राहत

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा. तेल और गैस की आपूर्ति में सुधार होने से ऊर्जा बाजार स्थिर हो सकते हैं. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों के सुचारु संचालन से कई देशों की अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि समझौता अभी प्रारंभिक रूप में है, फिर भी इसे शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.