दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की बैठक से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोमवार को जिनेवा पहुंचे. यहां से वह फ्रांस के एवियन शहर रवाना होंगे, जहां जी-7 शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है. इस बार सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब हाल ही में घोषित अमेरिका-ईरान शांति समझौते ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू कर दी है. कई देशों को उम्मीद है कि इस समझौते से ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चिंताएं कम होंगी और वैश्विक बाजारों को राहत मिल सकती है.
डोनाल्ड ट्रंप का जिनेवा पहुंचना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. दुनिया भर की निगाहें इस सम्मेलन पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसमें कई बड़े आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. ट्रंप के आगमन के बाद सम्मेलन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं. विभिन्न देशों के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं. ऐसे माहौल में यह सम्मेलन वैश्विक चुनौतियों पर साझा रणनीति तैयार करने का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है.
#WATCH | US President Donald Trump arrived at Hotel Royal in Évian-les-Bains, France. He is in Evian to attend the G7 Summit 2026.
— ANI (@ANI) June 15, 2026
Prime Minister Narendra Modi is scheduled to meet President Trump in France.
(Video Source: G7 France) pic.twitter.com/mxsnrEK4pj
हाल ही में घोषित अमेरिका-ईरान शांति ढांचे ने कई देशों को राहत की उम्मीद दी है. पिछले 107 दिनों के तनाव और संघर्ष के दौरान ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई थी. अब उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों के बीच बनी नई सहमति क्षेत्र में स्थिरता लाने में मदद करेगी. इससे केवल राजनीतिक माहौल ही नहीं, बल्कि व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है. कई विशेषज्ञ इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम मान रहे हैं.
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ था. यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है. संघर्ष के दौरान यहां गतिविधियों पर असर पड़ने से तेल बाजारों में अस्थिरता देखने को मिली थी. अब उम्मीद की जा रही है कि शांति समझौते के बाद यह मार्ग पूरी तरह सामान्य हो सकेगा. यदि ऐसा होता है तो अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति को मजबूती मिलेगी और बाजारों में दबाव कम होगा.
एवियन में होने वाले जी-7 सम्मेलन में केवल ऊर्जा सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है. सदस्य देशों के नेता मौजूदा भू-राजनीतिक हालात का आकलन करेंगे और भविष्य की रणनीतियों पर विचार करेंगे. ऐसे समय में जब दुनिया कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही है, यह बैठक वैश्विक सहयोग और समन्वय को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है.