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ट्रंप का छोटा अभियान बन गया विनाशकारी युद्ध, अमेरिका-ईरान संघर्ष के 6 महीने पूरे; जानें क्या कुछ बदला?

अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध को आज 6 महीने पूरे हो गए. इस छह महीने में क्या कुछ हुआ और किसे कितना नुकसान पहुंचा है, आज हम यहां जानेंगे.

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Edited By: Shanu Sharma
ट्रंप का छोटा अभियान बन गया विनाशकारी युद्ध, अमेरिका-ईरान संघर्ष के 6 महीने पूरे; जानें क्या कुछ बदला?
Courtesy: AI

अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू हुए आज 6 महीने पूरे हो गए. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब इस युद्ध की शुरुआत की थी तो उन्होंने चार हफ्ते का समय काफी बताया था. उन्होंने दावा किया था कि वह चार हफ्ते के अंदर ईरान से अपनी सारी शर्तें मनवा लेंगे. हालांकि अब ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है.

अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 28 फरवरी 2026 को अचानक ईरान पर हमला बोल दिया. हालांकि अचानक हुए इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई, लेकिन उसके बाद ईरान ऐसा खुलकर सामने आया जैसे उसके पास खोने को अब कुछ नहीं है.

6 महीने तक कैसे खिंचा युद्ध?

हम बचपन से सुनते आए हैं कि किसी को भी इतना नहीं डराना चाहिए कि उसके अंदर की डर खत्म हो जाए. शायद ईरान के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है. ईरान अब अमेरिका जैसी महाशक्ति से खुलकर युद्ध लड़ रहा है. ईरानी नेताओं का कहना है कि युद्ध का नेतृत्व ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई द्वारा किया जा रहा है. उनके द्वारा लड़ी जा रही इस जंग में पिछले 6 महीने में काफी कुछ बदल चुका है. यह बदलाव न केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित रहा, इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है.

युद्ध के दौरान क्या कुछ बदला?

  • युद्ध के दौरान हुए बदलावों की बात करें तो सबसे पहला मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का आता है. इस युद्ध के दौरान ईरान ने इस रास्ते पर अपनी पकड़ बना ली और पूरे विश्व को संकेत दिया कि वह चाहे तो सबके लिए समस्या खड़ी कर सकता है. हालांकि इसी छह महीने में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ समझौता करने की भी कोशिश की, लेकिन बाद में फिर से हमले शुरू हो गए. जिसके बाद ईरान ने इसे  समझौते की कोशिश नहीं ब्लकि चालाकि करार दिया. इस रास्ते के प्रभावित होने की वजह से पूरे विश्व का तेल सप्लाई चेन प्रभावित हुआ है और इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना हो रही है. 
  • रिपोर्ट के मुताबिक इस तनाव के बढ़ने के बाद ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में गिरावट आई है. उन्होंने चुनावी प्रचार के दौरान जो शांति का वादा किया था वह टूट गया. जिसकी वजह से लोगों का भरोसा उन पर से कम हो चुका है. लोग अब ट्रंप के इस मिशन के खिलाफ अपनी आवाज उठाने लगे हैं. इस साल के अंत में मध्यावधि चुनाव होना है, ऐसे में ट्रंप की घटती लोकप्रियता उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो सकती है. हालांकि उन्होंने अपने हर एक एक्शन के पीछे राष्ट्र हित का संदेश दिया है.  
  • अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था काफी प्रभावित हुई है. लोगों में डर का माहौल है जिसकी वजह से निवेश कम हो गया है और इसका असर हर एक इंसान की जेब पर पड़ रहा है. नुकसान के साथ ग्लोबल ग्रोथ रेट में कमी का अनुमान लगाया गया है. जिसे चिंता का विषय माना जा रहा है.
  • राष्ट्रपति ट्रंप ने जब 2025 में ईरान पर हमला किया था, तब उन्होंने यह दावा किया था कि अमेरिकी सैन्य हमले में ईरान का विशाल मिसाइल भंडार नष्ट हो चुका है. लेकिन जिस तरीके से ईरान ने अमेरिकी हमलों का जवाब 6 महीने तक दिया है उससे यह साफ है कि ट्रंप के दावे झूठे थे, ऐसे में उन्होंने अपने ऊपर से अमेरिकी नागरिकों का भरोसा खो दिया है.