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India Daily

Sanskrit Day 2026: 'परंपरा, संस्कृति और संस्कारों की आधारभूत भाषा...' संस्कृत दिवस पर CM धामी का बड़ा संदेश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संस्कृत दिवस पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए भाषा के संरक्षण और संवर्धन को लेकर सरकार के प्रयासों की जानकारी दी.

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Edited By: Reepu Kumari
Sanskrit Day 2026: 'परंपरा, संस्कृति और संस्कारों की आधारभूत भाषा...' संस्कृत दिवस पर CM धामी का बड़ा संदेश
Courtesy: @pushkardhami

देहरादून: संस्कृत दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर संदेश साझा करते हुए संस्कृत भाषा के महत्व को रेखांकित किया. सीएम धामी ने संस्कृत को देश की समृद्ध ज्ञान परंपरा, संस्कृति और संस्कारों से जुड़ी आधारभूत भाषा बताया. साथ ही उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड में संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया.

संस्कृत को बताया ज्ञान परंपरा की भाषा

सीएम धामी ने अपने संदेश में संस्कृत को भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा से जोड़ा. उन्होंने कहा कि यह भाषा संस्कृति और संस्कारों की आधारभूत भाषा है. भारत की पुरानी ज्ञान परंपरा में संस्कृत का महत्वपूर्ण स्थान रहा है. संस्कृत दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ने इसी विरासत को याद करते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं और भाषा के प्रति सम्मान की भावना को सामने रखा.

उत्तराखंड में संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार लगातार काम कर रही है. उनका संदेश ऐसे समय में आया है, जब संस्कृत को नई पीढ़ी और आम लोगों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है. सरकार की कोशिश भाषा की पारंपरिक पहचान को बनाए रखने के साथ उसके इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने की भी है.

13 जिलों में बनेगा आदर्श संस्कृत ग्राम

संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में एक-एक ‘आदर्श संस्कृत ग्राम’ विकसित किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में इस पहल की जानकारी दी. इसके जरिए संस्कृत को लोगों के बीच अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. प्रदेश के हर जिले में ऐसे एक गांव का विकास इस दिशा में सरकार की प्रमुख पहल के तौर पर सामने आया है.

किताबों तक सीमित नहीं रहे भाषा

सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि सरकार का प्रयास संस्कृत को केवल पुस्तकों तक सीमित रखने का नहीं है. उनका लक्ष्य इसे जन-जन के जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाना है. इसके लिए भाषा को लोगों के दैनिक परिवेश से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री के संदेश में संस्कृत को जीवंत परंपरा के रूप में आगे बढ़ाने की सोच दिखाई दी.

नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश

संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन की पहल के पीछे इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की भावना भी जुड़ी है. ‘आदर्श संस्कृत ग्राम’ की योजना के माध्यम से भाषा को समाज के स्तर पर मजबूत करने की कोशिश की जा रही है. मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में संस्कृत के प्रति लोगों के जुड़ाव को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और इसे जीवन के सामान्य व्यवहार से जोड़ने की बात कही.

परंपरा और आधुनिक जीवन के बीच सेतु

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संदेश में संस्कृत की पुरानी विरासत और वर्तमान जीवन के बीच जुड़ाव बनाने पर जोर दिखाई दिया. उन्होंने संस्कृत को ज्ञान, संस्कृति और संस्कारों से जोड़ते हुए इसके संरक्षण की बात कही. साथ ही ‘आदर्श संस्कृत ग्राम’ के जरिए इसे आम लोगों तक पहुंचाने की पहल का उल्लेख किया. सरकार का प्रयास है कि संस्कृत की पहचान सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में भी बनी रहे.