नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने सैकड़ों लोगों के जीवन छीन लिया. इन लोगों को शायद थोड़ा इल्म भी नहीं था कि अगले पल ही कुछ ऐसा हो जाएगा. सोशल मीडिया पर फुटेज शेयर किए जा रहे हैं, जिसमें लोग अपनी कहानी बताते नजर आ रहे हैं.
अधिकारियों ने अभी इस तबाही में मरने वालों की संख्या और बढ़ने का भी अनुमान लगाया है. हालांकि सभी के मन में सवाल यही है कि आखिर कुछ ही सेकंड के अंदर ऐसा क्या हुआ जो हालात काबू से बाहर हो गए. इस सवाल के जवाब के लिए वैज्ञानिक सैटेलाइट तस्वीरों की जांच कर रहे हैं.
ज्ञानिकों में जियोमॉर्फोलॉजिस्ट क्रिस्टन कुक और डैन शुगर शामिल हैं. उन्होंने बताया कि अभी तस्वीरें इतनी साफ नहीं मिली है लेकिन जितनी मिली है उससे केवल इतना पता चल पाया कि तिब्बत सीमा के पास लैंगटांग लिरुंग चोटी से ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर अलग हो गया था. जिसके बाद वह हिस्सा अपने साथ पत्थर, चट्टान और मलबा लेकर स्पीड में नीचे की ओर आया और फैल गया.
वैज्ञानिकों ने कहा कि इन तस्वीरों को देखकर ऐसा लग रहा है कि इस घटना से पहले न केवल ग्लेशियर टूटा बल्कि चट्टान का बड़ा टुकड़ा गिरा, जिसकी वजह से स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई. बाढ़ से पहले और अभी की तस्वीरों की तुलना करने पर यह पता चल पा रहा है कि नदी पहले के मुताबिक काफी चौड़ी हो गई है और रंग भी गहरा हो गया है.
कई तस्वीरों में बाढ़ के बाद का मलबा भी साफ नजर आ रहा है. अभी मलबे में लोगों की तलाश की जा रही है. कई लोग अपनों की सलामती की उम्मीद लेकर बैठे है. पीड़ितों के लिए राहत कार्य जारी है, वहीं भारत सरकार ने भी वहां के लोगों के लिए मदद भेजी है. साथ ही भारतीय पर्यटकों का भी लगातार अपडेट लिया जा रहा है. आने वाले समय में वैज्ञानिक इस घटना के पीछे का पूरा कारण विस्तार से बता सकते हैं.