नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुआ सीजफायर समझौता महज 24 घंटे में ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है. ईरान ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि डील की तीन महत्वपूर्ण शर्तों का उल्लंघन किया गया, जिसके बाद अब न तो युद्धविराम का कोई मतलब रह गया है और न ही आगे बातचीत की कोई गुंजाइश. ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने इस मुद्दे पर सख्त बयान जारी किया. उन्होंने साफ कहा कि जब बुनियादी शर्तें ही तोड़ी जा रही हैं तो वार्ता का क्या फायदा.
ईरान के अनुसार सीजफायर की पहली बड़ी शर्त लेबनान में पूर्ण युद्धविराम की थी, जिसका पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी खुलकर समर्थन किया था. लेकिन इजरायल ने लेबनान पर अब तक की सबसे भारी बमबारी शुरू कर दी है. ईरान इसे प्रत्यक्ष उल्लंघन मान रहा है और इसे बर्दाश्त नहीं करने की बात कह रहा है.
दूसरा उल्लंघन तब हुआ जब एक ड्रोन ईरान के हवाई क्षेत्र में घुस गया. इसे फार्स प्रांत के लार शहर के ऊपर मार गिराया गया. ईरान का कहना है कि सीजफायर में साफ लिखा था कि उसके हवाई क्षेत्र का कोई उल्लंघन नहीं होगा, लेकिन यह शर्त भी धरी की धरी रह गई.
तीसरा और बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा ईरान के यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) के अधिकार को नकारने का है. यह डील की छठी शर्त में शामिल था. ईरानी संसद अध्यक्ष ने कहा कि जब मूल अधिकारों को ही चुनौती दी जा रही है तो वार्ता का कोई व्यावहारिक आधार नहीं बचता.
स्थायी समझौते के लिए इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत अभी शुरू भी नहीं हुई थी कि सीजफायर ही टूटने लगा. ईरान ने साफ संकेत दिया है कि जब तक तीनों उल्लंघनों पर स्पष्ट जवाब और गारंटी नहीं मिलती, वह किसी भी तरह की नई बातचीत में शामिल नहीं होगा.
इस घटनाक्रम से पूरी दुनिया में चिंता फैल गई है. अगर सीजफायर पूरी तरह टूट गया तो खाड़ी क्षेत्र में फिर से बड़े स्तर पर तनाव बढ़ सकता है. ईरान का सख्त रुख दिखाता है कि वह अपनी शर्तों से एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं है.