नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम के बीच फारस की खाड़ी में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता दिख रहा है. समझौते की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही ईरान की नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट पर कड़ा रुख अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय जहाजों को चेतावनी दे दी कि बिना तेहरान की अनुमति कोई भी पोत इस समुद्री मार्ग में प्रवेश नहीं कर सकता. इस कदम ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े देशों में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है.
अमेरिका के साथ युद्धविराम पर सहमति जताने के तुरंत बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ और मजबूत दिखाने की कोशिश की. ईरानी नौसेना ने रेडियो संदेश के माध्यम से जहाजों को सूचित किया कि इस जलमार्ग से गुजरने के लिए ईरानी सेपाह नौसेना से अनुमति लेना अनिवार्य है. ऑडियो संदेशों में साफ कहा गया कि बिना अनुमति गुजरने की कोशिश करने वाले जहाज को नष्ट कर दिया जाएगा. वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, कई जहाज इस चेतावनी के बाद वहीं रुके रहे, जिससे क्षेत्र में असामान्य तनाव पैदा हो गया.
होर्मुज दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है, जिसकी चौड़ाई मात्र 34 किलोमीटर है. यह खाड़ी देशों को हिंद महासागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% यही से गुजरता है. पिछले छह सप्ताह से यह क्षेत्र संघर्ष का केंद्र रहा है. ईरान की नई चेतावनी ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मचा दिया है. कई देश चिंतित हैं कि अगर स्थिति बिगड़ी, तो तेल की सप्लाई पर गंभीर असर पड़ सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि दोनों देश दो सप्ताह के लिए युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं. उन्होंने कहा कि यह कदम पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रस्ताव के बाद संभव हुआ. ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि युद्धविराम का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलना है. उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि समझौता नहीं होता, तो 'एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती थी.' ट्रंप ने इस समझौते को अमेरिका की बड़ी जीत बताया.
हालांकि ईरान ने समझौते को स्वीकार किया है, लेकिन तेहरान ने इसे युद्ध का अंत मानने से इनकार कर दिया. ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि यह सिर्फ एक अंतराल है, और यदि दुश्मन ने कोई गलती की तो जवाब पूरी शक्ति से दिया जाएगा. रिपोर्टों के अनुसार, आगे की बातचीत पाकिस्तान में होनी है, जहां दोनों देशों के प्रतिनिधि सीजफायर को आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा करेंगे.