अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस आने वाले वर्षों में किसी NATO सदस्य देश पर सीमित स्तर का हमला कर सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा कदम इस वर्ष के अंत से लेकर 2029 के बीच कभी भी उठाया जा सकता है. अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित इस आकलन में कहा गया है कि संभावित हमला साइबर हमले से लेकर सीमित सैन्य कार्रवाई या जमीनी घुसपैठ तक हो सकता है. हालांकि, यह केवल खुफिया एजेंसियों का आकलन है और इसे लेकर रूस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि ऐसा कोई कदम उठाया जाता है, तो उसका उद्देश्य NATO की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था और अमेरिका की प्रतिबद्धता की परीक्षा लेना हो सकता है. अमेरिकी थिंक टैंक American Enterprise Institute की वरिष्ठ फेलो हीदर कॉनली के अनुसार, रूस लंबे समय से NATO की विश्वसनीयता को चुनौती देने और अमेरिका तथा उसके सहयोगियों के बीच दूरी पैदा करने की कोशिश करता रहा है. उनका कहना है कि किसी भी संभावित कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि अमेरिका किस तरह प्रतिक्रिया देता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पहले अमेरिका का मानना था कि यूक्रेन युद्ध में उलझा रूस NATO के साथ किसी नए टकराव का जोखिम नहीं उठाएगा लेकिन हालिया घटनाक्रम और बदलते सैन्य आकलन के बाद अमेरिकी एजेंसियों का मानना है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गठबंधन की दृढ़ता की परीक्षा लेने का प्रयास कर सकते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को भारी नुकसान और घरेलू दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उसकी रणनीति अधिक आक्रामक हो सकती है.
अमेरिकी आकलन में उन घटनाओं का भी जिक्र किया गया है, जिनमें रूस से दागी गई मिसाइलें पोलैंड की सीमा तक पहुंचीं या ड्रोन रोमानिया के हवाई क्षेत्र के पास देखे गए. हालांकि इन घटनाओं को NATO पर जानबूझकर किया गया हमला घोषित नहीं किया गया, लेकिन इन्हें सुरक्षा जोखिम के संकेत के रूप में देखा गया. रिपोर्ट का कहना है कि ऐसे घटनाक्रमों ने पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ाई है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूक्रेन को लगातार सैन्य सहायता और अन्य वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के कारण अमेरिका के कुछ महत्वपूर्ण हथियार भंडार पर दबाव बढ़ा है. इसमें लंबी दूरी की मिसाइलें, सामरिक मिसाइल प्रणालियां और स्टिंगर जैसे वायु रक्षा हथियार शामिल बताए गए हैं. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इन परिस्थितियों का भविष्य की किसी संभावित सैन्य प्रतिक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा. फिलहाल अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की यह रिपोर्ट संभावित जोखिम का आकलन है, न कि किसी आसन्न हमले की पुष्टि.