Bangladesh News: संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों का एक दल शेख हसीना के इस्तीफे से पहले और इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों की हत्या की जांच के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग मिशन भेजेगा. यह मिशन अगले हफ्ते बांग्लादेश पहुंचेगा और विरोध प्रदर्शन में कितने लोगों की मौत हुई इसकी तस्दीक करेगा. यूएन ने गुरुवार को यह घोषणा की है.
संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी के अनुसार, बांग्लादेश सरकार के मुख्य सलाहकार द्वारा एक्स पर पोस्ट की गई एक पोस्ट में कहा गया है कि 1971 में स्वतंत्रता के बाद से यह पहली बार होगा जब संयुक्त राष्ट्र बांग्लादेश में व्यापक मानवाधिकार हनन की जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग मिशन भेजेगा.
The United Nations is sending a UN fact finding team next week to probe atrocities committed during the Student Revolution in July and early this month.
UN human rights chief Volker Turk announced the move when he called Chief Adviser Professor Muhammad Yunus late Wednesday.— Chief Adviser of the Government of Bangladesh (@ChiefAdviserGoB) August 15, 2024
मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में 8 अगस्त को शपथ ली थी. इसके कुछ दिन पहले ही शेख हसीना की सरकार गिर गई थी और सरकारी नौकरियों में कोटा सुधारों को लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच 5 अगस्त को वह भारत आ गईं थीं.
बांग्लादेश सरकार के मुख्य सलाहकार ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि संयुक्त राष्ट्र जुलाई और इस महीने की शुरुआत में छात्र क्रांति के दौरान किए गए अत्याचारों की जांच के लिए अगले सप्ताह एक संयुक्त राष्ट्र तथ्य-खोजी टीम भेज रहा है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने बुधवार देर रात मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस को फोन करके इस कदम की
जानकारी दी है. इस बीच, तुर्क ने अपना समर्थन देने का आश्वासन दिया और कहा कि समावेशी, मानवाधिकार-केंद्रित दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करेगा कि परिवर्तन सफल हो.
यूनुस ने कहा कि मानवाधिकार उनके प्रशासन की आधारशिला होगी और प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने मानवाधिकारों को बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र से सहयोग मांगा है. इस बीच, बुधवार को बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण की जांच एजेंसी में हसीना और आठ अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है. इसमें उन पर उनकी सरकार के खिलाफ छात्रों के बड़े पैमाने पर आंदोलन के दौरान नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया गया है.