जिस नक्शे को देख दुनिया हुई बड़ी उसमें निकली सबसे बड़ी गलती? 450 साल बाद सुधार, नाम होगा ‘इक्वल अर्थ’
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया को नक्शे पर देखने का नजरिया बदलने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी है. नए ‘इक्वल अर्थ’ नक्शे में महाद्वीपों का आकार उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब नजर आएगा.
नई दिल्ली: दुनिया का नक्शा देखकर हम बचपन से ही देशों और महाद्वीपों का आकार समझते आए हैं. लेकिन जो तस्वीर हमें कागज पर दिखाई जाती रही, वह धरती के वास्तविक आकार की पूरी कहानी नहीं बताती. अब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस तस्वीर को बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. नए विश्व मानचित्र में अफ्रीका पहले से कहीं ज्यादा बड़ा दिखाई देगा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका का आकार अपेक्षाकृत छोटा नजर आएगा.
करीब 450 साल पुराना नक्शा
इस बदलाव के पीछे करीब 450 साल पुराना नक्शा है, जिसे ‘मर्केटर प्रोजेक्शन’ के नाम से जाना जाता है. 1569 में गेरार्डस मर्केटर ने इसे समुद्री यात्राओं के लिए तैयार किया था. उस समय जहाजों को सही दिशा में ले जाने के लिए सीधी रेखाओं में रास्ते दिखाना बेहद उपयोगी था. लेकिन इस तरीके से धरती के गोल आकार को कागज पर उतारते समय कुछ क्षेत्रों का वास्तविक आकार बिगड़ गया और यही अंतर सदियों तक दुनिया के सामने बना रहा.
गोल धरती को कागज पर उतारने की मुश्किल
धरती गोल है, लेकिन नक्शा सपाट होता है. इसे समझने के लिए संतरे का उदाहरण लिया जा सकता है. संतरे के छिलके को बिना मोड़े मेज पर फैलाने की कोशिश करेंगे तो वह कहीं न कहीं फटेगा या खिंचेगा. धरती के साथ भी यही समस्या आती है. मर्केटर नक्शे में दिशा और रास्तों को सीधा रखना प्राथमिकता थी, इसलिए ध्रुवों के पास के इलाके जरूरत से ज्यादा बड़े दिखाई देने लगे.
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अफ्रीका और ग्रीनलैंड की तस्वीर ने चौंकाया
इस पुराने नक्शे का सबसे बड़ा असर भूमध्य रेखा के आसपास के क्षेत्रों पर पड़ा. अफ्रीका और भारत जैसे बड़े भूभाग कागज पर अपेक्षाकृत छोटे दिखने लगे. वहीं यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ग्रीनलैंड का आकार जरूरत से ज्यादा बड़ा नजर आया. असलियत में अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है, लेकिन मर्केटर प्रोजेक्शन में दोनों लगभग समान आकार के दिखाई देते रहे. यही वजह है कि पुराने नक्शे की आलोचना होती रही.
नया नक्शा दुनिया को अलग नजर से दिखाएगा
‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन 2018 में कुछ कार्टोग्राफरों ने तैयार किया था. इसका उद्देश्य महाद्वीपों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के करीब दिखाना है. इसमें अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, दक्षिण एशिया और ओशिनिया पहले की तुलना में बड़े दिखाई देते हैं. इसके उलट यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे नजर आते हैं. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सदस्य देशों से पारंपरिक मर्केटर प्रोजेक्शन के बजाय इस नक्शे के इस्तेमाल की अपील की है.
164 देश साथ आए, अमेरिका ने जताया विरोध
संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया. अमेरिका ने इसका विरोध किया, जबकि छह देश मतदान से दूर रहे. प्रस्ताव को टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसी ने आगे बढ़ाया. उनका कहना था कि नक्शे बच्चों की पढ़ाई और दुनिया को समझने के नजरिए को प्रभावित करते हैं. अमेरिकी प्रतिनिधि यारिना फेरेंसविच ने फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र को वास्तविक वैश्विक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए.