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ईरान से युद्ध US के लिए बना गले की फांस! अब UAE ने दिए अमेरिकी सैन्य बेस हटाने के संकेत

यूएई में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर बहस तेज हो गई है. ईरानी हमलों के बाद इन्हें बोझ बताया जा रहा है और देश की सुरक्षा रणनीति पर नए सिरे से विचार करने की मांग उठी है.

KanhaiyaaZee
ईरान से युद्ध US के लिए बना गले की फांस! अब UAE ने दिए अमेरिकी सैन्य बेस हटाने के संकेत
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की भूमिका पर नई बहस शुरू हो गई है. हालिया घटनाओं के बाद कुछ विशेषज्ञ अब इन ठिकानों की जरूरत पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि बदलते हालात में यूएई अपनी सुरक्षा खुद मजबूत कर सकता है. इस चर्चा ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को लेकर नई चिंताएं भी पैदा कर दी हैं और भविष्य की रणनीति पर विचार को तेज कर दिया है.

यह बहस तब तेज हुई जब ईरान ने हालिया तनाव के दौरान यूएई में अमेरिकी ठिकानों से जुड़े स्थानों को निशाना बनाने का दावा किया. हालांकि अमेरिका ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है. इसके बावजूद इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और विदेशी सैन्य मौजूदगी पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

स्थानीय विशेषज्ञ की राय

प्रमुख विश्लेषक अब्दुलखालिक अब्दुल्ला ने कहा कि अब समय आ गया है कि अमेरिकी ठिकानों की उपयोगिता पर फिर से विचार किया जाए. उनके मुताबिक ये ठिकाने अब रणनीतिक संपत्ति नहीं बल्कि बोझ बनते जा रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यूएई अपनी सुरक्षा खुद संभालने में सक्षम है.

ईरानी हमलों का प्रभाव

ईरान ने दावा किया कि उसने यूएई में अमेरिकी से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. उसने अल मिनहाद के पास एक कमांड साइट पर हमला करने की बात कही. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. यूएई ने बताया कि उसने कई मिसाइल और ड्रोन हमलों को बीच में ही रोक लिया.

क्षेत्रीय तनाव का असर

ईरान ने यह भी कहा कि उसने बहरीन, इराक और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया. इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है. अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव का असर कई देशों पर पड़ रहा है और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं.

भविष्य की रणनीति पर नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई अब अपनी रक्षा नीति को नए सिरे से तैयार कर सकता है. वह आधुनिक हथियारों और तकनीक पर ज्यादा ध्यान दे सकता है. हालांकि अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग पूरी तरह खत्म होगा, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगा. आने वाले समय में इस मुद्दे पर और स्पष्टता सामने आ सकती है.