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तुर्की में फटीं ईरान की मिसाइलें, उधर पाकिस्तान का फूल गया दम; लॉन्च किया ये ऑपरेशन

तुर्की के आसमान में ईरानी मिसाइलों की गूंज ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है. अपने व्यापारिक हितों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन मुहाफिजुल बह्र' शुरू कर नौसेना को हाई अलर्ट पर रखा है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में छिड़ा संघर्ष अब पड़ोसी देशों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. ईरान द्वारा तुर्की के हवाई क्षेत्र में दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों ने सुरक्षा समीकरण बदल दिए हैं. हालांकि नाटो के रक्षा तंत्र ने इन हमलों को विफल कर दिया, लेकिन इस अशांति का असर समुद्री रास्तों पर पड़ने लगा है. ऐसे में पाकिस्तान ने अपने व्यापारिक जहाजों और ऊर्जा संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए कमान संभाली है. इस कूटनीतिक और सैन्य हलचल ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.

ईरान ने हाल ही में तुर्की की सीमाओं को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागीं, जिसे नाटो के आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने भूमध्यसागर के ऊपर ही ध्वस्त कर दिया. तुर्की के रक्षा मंत्रालय के अनुसार मलबे गाजियांटेप शहर के निर्जन इलाकों में गिरे, जिससे जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ. यह दूसरी बार है जब नाटो की इकाइयों ने ईरानी मिसाइल को बीच रास्ते में ही रोका है. तुर्की ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने में संकोच नहीं करेगा.

पाकिस्तान की समुद्री रणनीति 

तुर्की पर बढ़ते खतरों को देखते हुए पाकिस्तान भी सतर्क हो गया है. पाकिस्तानी नौसेना ने 'ऑपरेशन मुहाफिजुल बह्र' का ऐलान किया है. इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में पाकिस्तानी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है. सेना की मीडिया विंग आईएसपीआर ने बताया कि बदलती सुरक्षा स्थितियों के कारण यह फैसला लिया गया है. देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी रुकावट को रोकने के लिए नौसेना अब व्यापारी जहाजों की कड़ी निगरानी कर रही है ताकि व्यापार सुचारू रहे.

ऊर्जा सुरक्षा पर संकट समुद्री मार्ग पाकिस्तान के लिए जीवन रेखा की तरह हैं. खासकर तेल और गैस की आपूर्ति इन्हीं रास्तों से होती है. युद्ध जैसी स्थितियों में इन व्यापारिक मार्गों पर हमले का डर बना रहता है. आईएसपीआर के अनुसार नौसेना समुद्री संचार माध्यमों की रक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है. पाकिस्तान का मानना है कि यदि व्यापारिक जहाजों पर खतरा बढ़ता है, तो इसका सीधा असर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. इसलिए यह सैन्य पहल देश की आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा के लिए अत्यंत अनिवार्य मानी जा रही है.

तुर्की का कड़ा रुख 

मिसाइल हमले के बाद तुर्की ने ईरान को परोक्ष रूप से आगाह किया है. अंकारा ने कहा है कि वह क्षेत्रीय शांति और पड़ोसियों के साथ अच्छे रिश्तों को महत्व देता है, लेकिन अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा. तुर्की ने सभी पक्षों से उसकी चेतावनी का सम्मान करने को कहा है. अजरबैजान ने भी संकट की इस घड़ी में तुर्की को अपना पूर्ण समर्थन दिया है. नाटो के सुरक्षा कवच के कारण तुर्की फिलहाल बड़ी तबाही से सुरक्षित बचा हुआ है, जिससे ईरान की रणनीति विफल रही.