नई दिल्ली: ईरान में बढ़ते राजनीतिक संकट और हिंसक दमन के बीच अमेरिका की भूमिका को लेकर हलचल तेज हो गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर ईरानी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है और संकेत दिया है कि वॉशिंगटन जल्द कोई बड़ा कदम उठा सकता है. ट्रंप के बयानों से साफ है कि अमेरिका केवल कूटनीतिक दबाव तक सीमित नहीं रहना चाहता. इस बीच ईरान में मौतों का आंकड़ा 2,000 के पार पहुंच चुका है और सड़कों पर विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा.
मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरानी जनता के नाम तीखा संदेश दिया. उन्होंने प्रदर्शनकारियों को देशभक्त बताया और उनसे सड़कों पर उतरते रहने की अपील की. ट्रंप ने लिखा कि संस्थानों पर नियंत्रण करो और मदद रास्ते में है. पोस्ट के अंत में उन्होंने 'Make Iran Great Again' लिखा, जिसे अमेरिका की संभावित सक्रिय भूमिका के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
ट्रंप ने कहा कि ईरान के नेताओं ने उनसे संपर्क कर बातचीत की इच्छा जताई है. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने बताया कि एक बैठक की तैयारी हो रही थी. हालांकि ट्रंप ने यह भी साफ किया कि किसी भी बैठक से पहले कार्रवाई करनी पड़ सकती है. उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका सैन्य या अन्य कड़े कदम उठाने के लिए तैयार है.
ईरान में हालात पर व्हाइट हाउस में लगातार नजर रखी जा रही है. ट्रंप ने कहा कि उन्हें हर घंटे हालात की जानकारी दी जा रही है और जल्द फैसला लिया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी सेना संभावित विकल्पों का अध्ययन कर रही है. वॉशिंगटन ईरानी शासन की ओर से प्रदर्शनकारियों पर हो रही कार्रवाई को लेकर कई तरह की प्रतिक्रिया पर विचार कर रहा है.
सैन्य विकल्पों के साथ साथ अमेरिका ने आर्थिक मोर्चे पर भी दबाव बढ़ाया है. ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा. ईरान एक बड़ा तेल निर्यातक है और यह कदम उसकी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है. ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है.
ईरान ने अब तक अमेरिकी टैरिफ घोषणा पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन चीन ने इस कदम की तीखी आलोचना की है. ईरान अपने तेल का बड़ा हिस्सा चीन को निर्यात करता है, जबकि तुर्की, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और भारत भी उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं. जानकारों का मानना है कि अगर अमेरिका ने सैन्य कदम उठाया तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक बाजारों पर पड़ेगा.