नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच पश्चिमी एशिया का अहम देश कतर खुलकर सामने आ गया है. मंगलवार, 13 जनवरी को कतर ने अमेरिका को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर उसने पड़ोसी देश ईरान पर सैन्य हमला किया, तो इसके नतीजे पूरे क्षेत्र के लिए बेहद खतरनाक और विनाशकारी हो सकते हैं. कतर की राजधानी दोहा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने कहा कि किसी भी तरह का सैन्य तनाव न केवल क्षेत्र बल्कि उससे बाहर के देशों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.
माजेद अल-अंसारी ने कहा कि कतर ऐसे हालात से हर कीमत पर बचना चाहता है. उनके अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच अगर युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो इसका असर पूरे पश्चिमी एशिया में फैल सकता है. उन्होंने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब अमेरिका की ओर से ईरान में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों पर सरकारी कार्रवाई को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी जा रही है और हमले की धमकियां सामने आ रही हैं.
दरअसल, पिछले साल जून में अमेरिका ने ईरान की कुछ परमाणु सुविधाओं पर हमला किया था. इसके जवाब में ईरान ने कतर में स्थित अमेरिका के अल-उदीद सैन्य अड्डे को निशाना बनाया था. यह कतर की जमीन पर पहली बार इतना बड़ा हमला था. हालांकि, उस समय कतर ने हालात को संभालते हुए अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने और युद्धविराम कराने में अहम भूमिका निभाई थी. अब कतर को डर है कि अगर अमेरिका दोबारा ईरान पर हमला करता है, तो ईरान फिर से अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकता है, जिसका असर कतर पर भी पड़ सकता है.
इस बीच ईरान खुद अंदरूनी संकट से जूझ रहा है. देश में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं, जो कई जगह हिंसक रूप ले चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में अब तक करीब 2000 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें सुरक्षाकर्मी और आम नागरिक दोनों शामिल हैं. हालात को देखते हुए व्हाइट हाउस ने सोमवार को दोहराया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हवाई हमले के विकल्प पर विचार कर रहे हैं, ताकि प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई रोकी जा सके.
वहीं, दूसरी ओर ईरान ने भी अमेरिका को कड़ा जवाब दिया है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान में दखल दिया, तो उसका जवाब जरूर दिया जाएगा. उन्होंने सरकारी टीवी पर प्रसारित संदेश में कहा कि अमेरिकी सेना और समुद्री जहाज ईरान के लिए वैध लक्ष्य होंगे. इस बयान के बाद पूरे इलाके में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है और युद्ध जैसी स्थिति बनती दिख रही है.
हालांकि, अमेरिका ने यह भी कहा है कि बातचीत और कूटनीति का रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है. वाशिंगटन का कहना है कि निजी बातचीत में ईरान का रुख पहले से अलग नजर आ रहा है. इसी बीच कतर के विदेश मंत्रालय ने भी जोर दिया है कि अब भी कूटनीतिक समाधान की संभावना मौजूद है. माजेद अल-अंसारी ने कहा कि कतर सभी पक्षों से बातचीत कर रहा है और चाहता है कि पड़ोसी देशों और साझेदारों के साथ मिलकर किसी शांतिपूर्ण हल तक पहुंचा जाए.
मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट भी हालात की गंभीरता को दिखाती है. नॉर्वे स्थित संस्था ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) ने बताया कि विरोध-प्रदर्शनों में कम से कम 648 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें नौ नाबालिग भी शामिल हैं. संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि असल संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है और कुछ अनुमान इसे 6,000 से ऊपर बता रहे हैं. पश्चिमी एशिया इस समय बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है और किसी भी गलत कदम के गंभीर परिणाम हो सकते हैं.