नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई रणनीति की चर्चा सामने आई है. खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ संभावित गुप्त जमीनी अभियान की तैयारी कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस मिशन में वही एलीट स्पेशल फोर्स शामिल की जा सकती है जिसने 2011 में पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन के खिलाफ कार्रवाई की थी. इस योजना में इजरायल की खुफिया और सैन्य इकाइयों का सहयोग भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
डेल्टा फोर्स अमेरिकी सेना की सबसे खास काउंटर-टेररिज्म यूनिट मानी जाती है. इसकी स्थापना 1977 में कर्नल चार्ल्स बेकविथ ने की थी. यह यूनिट बेहद संवेदनशील मिशनों के लिए जानी जाती है, जैसे दुश्मन के इलाके में घुसकर अहम टारगेट पर हमला करना या बंधकों को बचाना. इसके ऑपरेशन पूरी तरह गोपनीय रखे जाते हैं. माना जाता है कि ईरान में भी यह यूनिट रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है.
सायरेट मटकल इजरायल डिफेंस फोर्स की प्रमुख स्पेशल यूनिट है, जिसकी स्थापना 1957 में हुई थी. यह छोटी टीमों में काम करती है और दुश्मन के इलाके में गुप्त तरीके से घुसकर खुफिया जानकारी जुटाने या टारगेट पर कार्रवाई करने में माहिर है. 1976 में उगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट पर बंधकों को छुड़ाने वाले ऑपरेशन में भी इसी यूनिट ने अहम भूमिका निभाई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी बंकरों वाले इलाकों में यह यूनिट खास तौर पर प्रभावी साबित हो सकती है.
इन एलीट फोर्सेज के पास दुनिया के अत्याधुनिक हथियार और तकनीक मौजूद होती है. इनमें HK416 और M4A1 कार्बाइन राइफल, आधुनिक स्नाइपर राइफल, साइलेंसर लगे हथियार और हाई-टेक कम्युनिकेशन सिस्टम शामिल हैं. मिशन के दौरान नाइट विजन गॉगल्स, थर्मल इमेजिंग और ड्रोन तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाता है. कई बार ऐसे उपकरण भी उपयोग में लाए जाते हैं जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं होती और जिन्हें बेहद गोपनीय रखा जाता है.
स्पेशल फोर्सेज आमतौर पर छोटी और तेज टीमों में काम करती हैं. पहले ड्रोन और खुफिया नेटवर्क के जरिए इलाके की जानकारी जुटाई जाती है, फिर अचानक हमला किया जाता है. क्लोज क्वार्टर बैटल, हाई-एल्टीट्यूड पैराशूट जंप और गुप्त घुसपैठ जैसे तरीके इनकी खास रणनीतियों में शामिल हैं. मिशन पूरा होने के बाद टीम तुरंत सुरक्षित तरीके से इलाके से बाहर निकल जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी किसी भी कार्रवाई का असर पूरे क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है.