International News: अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐसी प्रॉब्लम आई है, जिसने सबको चौंका कर रख दिया. यह प्रॉब्लम इतनी बढ़ी है कि इसको लेकर एक अलग ही जंग छिड़ गई है. एक तरफ दोनों देश एक दूसरे पर वार करने को तैयार हैं, वहीं दूसरी ओर टॉयलेट जाम की समस्या ने अलग परेशानी खड़ी कर दी है. दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड आर. फोर्ड तेजी से मिडिल ईस्ट में तैनात हो रहा है, लेकिन अब इस जहाज में ज्यादातर टॉयलेट जाम हैं, जिससे जहाज पर मौजूद सैनिकों का जीना मुश्किल हो गया है. यह जहाज एक बड़ी प्रॉब्लम लेकर आया है. 4,500 से ज्यादा नाविकों को रोज 45 मिनट तक लाइन में लगने को मजबूर होना पड़ता है. इसका सीवेज सिस्टम पूरी तरह से फेल हो गया है.
USS गेराल्ड आर. फोर्ड जून 2025 से समुद्र में तैनात है. जनवरी में इसी जहाज ने वेनेजुएला पर अमेरिका की कार्रवाई के दौरान अहम भूमिका निभाई थी. इसके कारण ही राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया गया था. अब ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, इस युद्धपोत को मिडिल ईस्ट में तैनात किया गया है.
इस जहाज में टॉयलेट बंद होने और खराब सीवेज सिस्टम की वजह से हालात और खराब हो गए हैं. दुनिया का सबसे महंगा युद्धपोत माने जाने वाले इस जहाज में लगभग 650 टॉयलेट हैं, जिनमें से ज्यादातर काम नहीं कर रहे हैं. एक रिपोर्ट और नाविकों के इंटरव्यू के मुताबिक, समुद्र में लगातार मौजूद रहने की वजह से रेगुलर मेंटेनेंस की कमी रही है, जिससे यह हालत हुई है.
हालात इतने खराब हैं कि टॉयलेट की कमी की वजह से रोज 45 मिनट तक लंबी लाइनें लग रही हैं. प्लंबिंग और मरम्मत के लिए जिम्मेदार टेक्नीशियन और नाविकों के बीच अक्सर झगड़े होते रहते हैं. सिस्टम को ठीक करने के लिए टेक्नीशियन दिन में 19 घंटे तक काम कर रहे हैं. यह पहली बार नहीं है जब यह समस्या हुई है.
असल में यह समस्या एक टेक्निकल कमी से जुड़ी है. लेटेस्ट सुविधाओं से लैस होने के बावजूद, यह वॉरशिप एक कमजोर वैक्यूम-बेस्ड सीवेज सिस्टम पर निर्भर है. इसका मतलब है कि एक भी वाल्व फेल होने से जहाज के सभी टॉयलेट जाम हो सकते हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर बार सिस्टम की मरम्मत पर एसिड फ्लशिंग पर लगभग $400,000 खर्च होते हैं. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन समस्याओं का उनके मिलिट्री ऑपरेशन पर कोई असर नहीं पड़ रहा है, लेकिन घर से दूर रहने वाले सैनिकों ने जहाज की असलियत अपने परिवारों को बताई है.
गेराल्ड फोर्ड पर तैनात कई नाविक 20 से 25 साल के हैं. लगातार ड्यूटी और लंबी तैनाती की थकान उनके चेहरों पर साफ दिखती है. परिवार से दूर रहने का असर भी बहुत गहरा होता है. इस स्थिति ने कुछ सैनिकों को अपने मौजूदा मिशन के बाद मिलिट्री छोड़ने पर भी सोचने पर मजबूर कर दिया है.