नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ा युद्ध अब पांचवें दिन में है. तेहरान में बुधवार तड़के हुए धमाकों ने पूरी दुनिया को दहला दिया है. सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने बड़े पैमाने पर जवाबी हमले शुरू किए हैं. रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने खाड़ी में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. यह संघर्ष अब दशकों के सबसे भीषण स्तर पर पहुंच गया है.
जानकारी के मुताबिक, बुधवार तड़के तेहरान में हुए धमाकों ने क्षेत्र में भीषण युद्ध की पुष्टि कर दी है. इजरायली सेना ने ईरानी मिसाइल साइटों और परमाणु केंद्रों पर हमलों की 'व्यापक लहर' चलाई है. इजरायल का दावा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरानी मिसाइलों को नाकाम कर दिया है. तेहरान में सुबह होते ही कई इलाकों में भीषण तबाही और धुएं के गुबार देखे गए.
युद्ध की सबसे बड़ी खबर सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत रही. अमेरिकी-इजरायली हमलों में उनकी मृत्यु के बाद ईरान में शोक की लहर है. इजरायल ने कोम में उस बैठक पर भी हमला किया जहां नए नेता के चयन की प्रक्रिया चल रही थी. इजरायली रक्षा मंत्री ने चेतावनी दी है कि जो भी नया नेता चुना जाएगा, वह उनका अगला शिकार होगा.
ईरानी सेना (IRGC) ने 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' के तहत 230 से अधिक ड्रोनों से हमला किया है. ईरान का दावा है कि बहरीन में अमेरिकी एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचा है और 680 से अधिक अमेरिकी सैनिक हताहत हुए हैं. तेहरान ने साफ किया है कि यह सैन्य अभियान दुश्मन की निर्णायक हार होने तक निरंतर और बिना रुके जारी रहेगा.
युद्ध अब कूटनीतिक परिसरों तक पहुंच गया है. रियाद में अमेरिकी दूतावास और दुबई में वाणिज्य दूतावास पर संदिग्ध ड्रोन हमले हुए हैं. रियाद दूतावास को आग लगने के बाद बंद कर दिया गया है. सऊदी अरब में सीआईए के स्टेशन पर भी ईरानी हमले की खबर है. खाड़ी के उन देशों को धमकी दी गई है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं.
विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि तेहरान में बमबारी से उनकी युद्ध क्षमता पर कोई असर नहीं होगा. उन्होंने अपनी रक्षा प्रणाली के जरिए अमेरिका को चुनौती दी है. वरिष्ठ सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने भी कहा कि उन्हें अमेरिका पर कोई भरोसा नहीं है और बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है. ईरान इस युद्ध को अपनी मर्जी के अनुसार लंबा खींचने के लिए तैयार है.