यह पहली बार नही है कि तालिबान ने ऐसी हरकत की है. ऐसा पहले भी हो चुका है. इस बार में तालिबान की सुप्रीम कोर्ट ने 14 महिलाओं समेत 63 लोगों को सार्वजनिक रूप से कोड़े मारे जाने का आदेश दिया था. इन लोगों पर अप्राकृतिक यौन उत्पीड़न, चोरी और अनैतिक संबंधों जैसे अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था. इन लोगों पर अफगानिस्तान के किसी खेल के मैदान में कोड़े बरसाए गए. अब इस पर संयुक्त राष्ट्र ने भी नाराजगी जाहिर की है और तालिबानी सरकार के इस कदम की सख्त निंदा भी की है.
दरअसल, अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत की क्रूरता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. अफगानिस्तान के सारी पुल प्रांत में तालिबानी हुकूमत द्वारा फिर से 14 महिलाओं सहित 63 लोगों की सरेआम कोड़ों से मारने का मामला सामने आ रहा है. इनकी क्रूरता इस कदर बढ़ गई है कि इसे देखकर सारी दुनिया परेशान है. जब इस मामले की जानकारी संयुक्त राष्ट्र अमेरिका को हुई तो वह भी इस पर भड़क उठा. संयुक्त राष्ट्र के सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने इस हैरतअंगेज सजा की कड़ी निंदा की है.
संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बयान में कहा कि अफगानिस्तान के अधिकारियों ने मंगलवार को कम से कम 63 लोगों को कोड़े मारे हैं. तालिबान के इस कदम की संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने कड़ी निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार के दायित्वों का सम्मान करने के लिए कहा है.
तालिबानी सुप्रीम कोर्ट ने 14 महिलाओं समेत 63 लोगों को सार्वजनिक रूप से कोड़े मारे जाने का आदेश दिया था. इन लोगों पर अप्राकृतिक यौन उत्पीड़न, चोरी और अनैतिक संबंधों जैसे अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था. साल 2021 में अफगानिस्तान पर कब्जा जमाने के बाद तालिबान पूरी दुनिया के सामने चीखते हुए कह रहा था कि उसने देश में लोकतांत्रिक सरकार देने की कोशिश की है.
हालांकि, तमाम दावों से उलट तालिबान की सरकार की क्रूरता लगातार सामने आती रही है. महिलाओं के खिलाफ कठोर कानून, गाना गानें और सुनने पर पाबंदी, महिलाओं की शिक्षा पर पाबंदी, बुर्का और पुरुषों के लिए दाढ़ी अनिवार्य जैसे कई कानून हैं. मामूली अपराधों के लिए भी फांसी, कोड़े मारना और पत्थर मारने जैसे दंड हैं. तालिबान के 1990 के दशक के शासन में भी यही होता था.