नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी और आधिकारिक चैनल ने पुष्टि की है कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों में मौत हो गई. बताया गया है कि हमले के समय वह तेहरान स्थित अपने दफ्तर में मौजूद थे. इस घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति को झकझोर दिया है और क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की आशंका गहरा दी है.
ईरानी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ और सरकारी एजेंसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संयुक्त हमलों में खामेनेई मारे गए. चैनल ने इसे इस्लामिक गणराज्य के लिए बड़ी क्षति बताया. उनकी मौत के बाद देशभर में 40 दिनों के सार्वजनिक शोक की घोषणा की गई है. सरकारी इमारतों पर झंडे झुका दिए गए हैं और धार्मिक स्थलों पर विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जा रही हैं.
रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले में खामेनेई के परिवार के कई सदस्य भी मारे गए. ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि उनकी बेटी, दामाद और पोते की भी जान गई. हालांकि इसकी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पुष्टि नहीं हो सकी है. इस खबर ने ईरान के भीतर भावनात्मक माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है.
The Supreme Leader of Iran, Ayatollah Seyyed Ali Khamenei, is dead; his body has been found: Senior Israeli official to Reuters pic.twitter.com/2q8JdwxLMm
— ANI (@ANI) February 28, 2026
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बयान जारी कर खामेनेई को श्रद्धांजलि दी और उनकी मौत को 'सम्मानित शहादत' बताया. संगठन ने अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराते हुए कड़े प्रतिशोध की चेतावनी दी है. साथ ही नागरिकों से एकजुट रहने और संयम बनाए रखने की अपील की गई. बयान में कहा गया कि उनका मार्ग और विचारधारा आगे भी जारी रहेगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि 'इतिहास के सबसे क्रूर व्यक्तियों में से एक' अब नहीं रहा. उन्होंने इसे ईरान की जनता के लिए अवसर बताया. वहीं इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिए कि यह एक सटीक और योजनाबद्ध कार्रवाई थी. इजरायली सूत्रों ने इसे अत्याधुनिक तकनीक से अंजाम दी गई सर्जिकल स्ट्राइक बताया है.
खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद ईरान में सत्ता के उत्तराधिकार को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. तेहरान में सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और सड़कों पर सन्नाटा है. विदेश मंत्रालय और सैन्य नेतृत्व ने जवाबी कार्रवाई की बात कही है. इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंतित कर दिया है और क्षेत्रीय युद्ध की आशंका तेज हो गई है.