ब्रिटेन एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता के दौर में पहुंच गया है. कीर स्टारमर के इस्तीफे के बाद देश को एक दशक के भीतर सातवां प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है. कीर स्टारमर ने 22 जून 2026 को लेबर पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने केवल दो साल के कार्यकाल के बाद पद छोड़ने की घोषणा की, जो ब्रिटेन की लगातार बनी हुई राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाता है.
कीर स्टारमर के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री पद की दौड़ में ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहम का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है. हालांकि सवाल यह है कि यदि बर्नहम प्रधानमंत्री बनते हैं, तो क्या वह अपना कार्यकाल पूरा कर पाएंगे? इसके साथ ही यह भी चर्चा का विषय है कि आखिर ब्रिटेन की जनता अब अपने नेतृत्व से क्या चाहती है.
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ब्रिटेन की संसदीय व्यवस्था में प्रधानमंत्री बदलने के लिए आम चुनाव कराना आवश्यक नहीं होता. यदि सत्तारूढ़ दल के सांसद अपने नेता पर भरोसा खो देते हैं, तो वे उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. वहीं, कई बार प्रधानमंत्री अविश्वास की स्थिति बनने से पहले ही स्वेच्छा से इस्तीफा दे देते हैं. पिछले एक दशक में ब्रिटेन में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है. साल 2016 के बाद से अब तक 6 प्रधानमंत्री पद छोड़ चुके हैं. सबसे पहले डेविड कैमरन ने 2016 में इस्तीफा दिया. वह 2010 से 2016 तक करीब छह वर्षों तक प्रधानमंत्री रहे और हाल के वर्षों में सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने वाले नेता साबित हुए.
उनके बाद थेरेसा मे ने 2016 से 2019 तक लगभग तीन साल तक देश का नेतृत्व किया. इसके बाद बोरिस जॉनसन 2019 से 2022 तक प्रधानमंत्री रहे. हालांकि उनके बाद पद संभालने वाली लिज ट्रस का कार्यकाल केवल 49 दिनों का रहा, जो ब्रिटेन के इतिहास के सबसे छोटे प्रधानमंत्रित्व कालों में गिना जाता है. लिज ट्रस के बाद ऋषि सुनक करीब दो साल तक प्रधानमंत्री रहे और अब कीर स्टारमर ने भी लगभग दो साल बाद पद छोड़ दिया है.
ब्रिटेन की राजनीति को करीब से समझने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि देश की मौजूदा स्थिति के पीछे कई कारण हैं. इनमें सबसे प्रमुख कारण ब्रेक्जिट को माना जाता है. 23 जून 2016 को ब्रिटेन ने यूरोपीय संघ से अलग होने के पक्ष में मतदान किया था. इसके बाद से देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ा है. इसके अलावा बड़ी संख्या में ब्रिटिश नागरिक चुनावी सुधारों की मांग कर रहे हैं. दो प्रमुख दलों लेबर और कंजर्वेटिव के बीच लंबे समय से चल रही राजनीति से भी कई मतदाता निराश दिखाई दे रहे हैं. यही वजह है कि देश में वैकल्पिक नेतृत्व और नई राजनीतिक दिशा की मांग लगातार बढ़ रही है.
2024 के आम चुनाव में कीर स्टारमर को भारी जनसमर्थन मिला था, लेकिन उस समय भी ब्रिटेन आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहा था. अब उनका इस्तीफा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि जनता की अपेक्षाएं अभी भी पूरी तरह पूरी नहीं हो सकी हैं. आने वाले समय में सबसे दिलचस्प सवाल यह होगा कि क्या ब्रिटेन की जनता लेबर और कंजर्वेटिव पार्टियों से आगे बढ़कर किसी तीसरे राजनीतिक विकल्प को मौका देने का फैसला करेगी, या फिर सत्ता का संघर्ष इन्हीं दो दलों के बीच जारी रहेगा. फिलहाल पूरे देश की नजरें नए नेतृत्व और उसके सामने मौजूद चुनौतियों पर टिकी हुई हैं.