नई दिल्ली: प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों में सिक्के डालने की परंपरा को लेकर अपनी राय साझा की है. उन्होंने कहा कि नदियों में सिक्के डालने की कोई शास्त्रीय आज्ञा नहीं है और इससे किसी प्रकार का विशेष धार्मिक लाभ नहीं मिलता. उनके अनुसार श्रद्धा के साथ विवेक का उपयोग करना भी उतना ही आवश्यक है.
भारत में लंबे समय से नदियों, कुओं और जल स्रोतों में सिक्के डालकर मनोकामना मांगने की परंपरा चली आ रही है. बहुत से लोग मानते हैं कि ऐसा करने से उनकी इच्छा पूरी होती है और उन्हें पुण्य की प्राप्ति होती है. हालांकि धार्मिक ग्रंथों में इस परंपरा को लेकर कोई स्पष्ट और अनिवार्य निर्देश नहीं मिलता. इसे अधिकतर व्यक्तिगत आस्था और विश्वास से जुड़ी परंपरा माना जाता है.
हाल ही में एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से प्रश्न किया कि क्या गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों में सिक्के डालना उचित है. इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति नदी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना चाहता है तो वह सिक्के डालने के बजाय एक रुपये का आटा खरीद सकता है और उसकी छोटी-छोटी गोलियां बनाकर नदी में डाल सकता है. इससे नदी में रहने वाली मछलियों, कछुओं और अन्य जीवों को भोजन मिलेगा और उसका वास्तविक लाभ होगा.
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि नदियों में रुपये फेंकने से कोई विशेष धार्मिक फल प्राप्त नहीं होता. उन्होंने इसे लोगों द्वारा अपनी ओर से बनाई गई परंपरा बताया और कहा कि इसके समर्थन में कोई शास्त्रीय आदेश नहीं है. उनके अनुसार सिक्के डालने से नदियों का प्रदूषण भी बढ़ता है.
उन्होंने यह भी कहा कि कई स्थानों पर छोटे बच्चे और अन्य लोग चुंबक की सहायता से नदी में पड़े सिक्कों को निकाल लेते हैं. ऐसे में सिक्के डालने से न तो नदी का कोई लाभ होता है और न ही समाज का. इसलिए लोगों को अपनी श्रद्धा को अधिक उपयोगी और सार्थक दिशा में लगाना चाहिए.
प्रेमानंद महाराज ने सुझाव दिया कि यदि कोई व्यक्ति 100 रुपये दान करना चाहता है तो वह उस धन से गायों के लिए चारा खरीद सकता है, किसी जरूरतमंद या बीमार व्यक्ति की सहायता कर सकता है या किसी भूखे को भोजन करा सकता है. उनके अनुसार यही सच्चे अर्थों में पुण्य और सेवा का कार्य होगा.
उन्होंने लोगों से अपील की कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा का भी ध्यान रखें. इससे श्रद्धा का उद्देश्य भी पूरा होगा और समाज को भी लाभ मिलेगा.