उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. लंबे समय से लो-वोल्टेज, ओवरलोडिंग और बिजली कटौती जैसी समस्याओं से जूझ रहे पुराने लखनऊ के लोगों को जल्द ही बेहतर बिजली आपूर्ति मिलने की उम्मीद है.
बिजली विभाग ने क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 550 करोड़ रुपये की व्यापक योजना तैयार की है, जिसके तहत नए बिजली उपकेंद्रों, ट्रांसमिशन सुविधाओं और फीडरों का निर्माण किया जाएगा. इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आरडीएसएस के तहत लागू किया जाएगा, जिससे वर्ष 2031 तक की बिजली मांग को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
बिजली विभाग की योजना के अनुसार लखनऊ सेंट्रल जोन के विभिन्न क्षेत्रों में सात नए बिजली उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे. इनमें तालकटोरा में दो नए उपकेंद्र बनाए जाएंगे, जबकि ऐशबाग, मलपुर (राजाजीपुरम), राजेंद्र नगर, अर्जुनगंज और बालागंज में एक-एक उपकेंद्र का निर्माण प्रस्तावित है.
सभी उपकेंद्र 20-20 एमवीए क्षमता के होंगे, जिससे बढ़ते लोड को संतुलित करने और उपभोक्ताओं तक बेहतर बिजली पहुंचाने में मदद मिलेगी. इन उपकेंद्रों के निर्माण से राजाजीपुरम, अपट्रॉन, ऐशबाग, ठाकुरगंज, चौक, रेजीडेंसी, राजभवन, हुसैनगंज और अमीनाबाद जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा.
यह योजना सिर्फ नए उपकेंद्रों के निर्माण तक ही सीमित नहीं है. क्षेत्र की मौजूदा बिजली व्यवस्था को भी आधुनिक और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया है. इसके तहत 11 मौजूदा उपकेंद्रों के पावर ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जाएगी. इसके अलावा 33 केवी और 11 केवी की नई बिजली लाइनें बिछाई जाएंगी.
नई एलटी लाइनों में इंसुलेटेड कंडक्टर का उपयोग किया जाएगा, जिससे तकनीकी खराबियों और बिजली नुकसान को कम किया जा सकेगा. पुराने लखनऊ में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बिजली फीडरों पर बढ़ता दबाव है. इसे दूर करने के लिए कुल 100 नए फीडर बनाए जाने की योजना तैयार की गई है. विभाग के अनुसार नए उपकेंद्रों से 70 नए फीडर विकसित होंगे, जबकि मौजूदा उपकेंद्रों में 30 अतिरिक्त फीडर जोड़े जाएंगे. इससे बिजली का भार संतुलित होगा और बार-बार ट्रिपिंग तथा कटौती की समस्या में कमी आएगी.