सऊदी अरामको रिफाइनरी पर फिर हुआ ईरानी ड्रोन अटैक, ईरान के हमले से दहला सऊदी अरब; दुनिया में मचेगा तेल का हाहाकार!
सऊदी अरब की रिफाइनरी रास तनुरा पर ड्रोन हमले की कोशिश नाकाम रही. हालांकि सोमवार को हुए पिछले हमले के बाद अरामको ने एलपीजी निर्यात अस्थायी तौर पर रोक दिया है. क्षेत्रीय संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतें जनवरी 2025 के बाद उच्चतम स्तर पर हैं.
नई दिल्ली: सऊदी अरब की सबसे महत्वपूर्ण तेल कंपनी अरामको एक बार फिर हमलों के घेरे में है. रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि रास तनुरा रिफाइनरी पर ड्रोन हमला करने की कोशिश को पूरी तरह विफल कर दिया गया है. यह घटनाक्रम ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का हिस्सा है. इस वैश्विक अस्थिरता ने न केवल सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ाई हैं, बल्कि तेल बाजार में कीमतों में भी भारी उछाल ला दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है.
सऊदी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक रास तनुरा स्थित सबसे बड़ी रिफाइनरी को ड्रोन के जरिए निशाना बनाने का प्रयास किया गया था. जांच से पता चला कि यह हमला सुनियोजित था, लेकिन सुरक्षा प्रणालियों ने इसे सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया. इस घटना में किसी भी प्रकार का नुकसान या हताहत होने की खबर नहीं है. हमले की विफलता ने फिलहाल एक बड़े संकट को टाल दिया है. हालांकि तेल उत्पादन क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है.
पिछले हमले और उत्पादन पर प्रभाव
बता दें कि इसी सप्ताह सोमवार को 'शाहेद-136' आत्मघाती ड्रोनों से हुए हमले में रिफाइनरी में आग लग गई थी. उस वक्त सुरक्षा के लिहाज से कुछ इकाइयों को बंद करना पड़ा था. हालांकि स्थानीय स्तर पर ईंधन की आपूर्ति सामान्य रही, लेकिन कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए एलपीजी निर्यात को कुछ हफ्तों के लिए निलंबित कर दिया है. अरामको ने मलबे से लगी आग पर तुरंत काबू पा लिया था, फिर भी निर्यात बाधित होने से बाजार में दबाव बना हुआ है.
क्षेत्रीय संघर्ष का मुख्य कारण
यह हमला ईरान पर अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई का प्रतिशोध माना जा रहा है. इसके बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं. सऊदी अरब का भौगोलिक स्थान उसे इस संघर्ष में संवेदनशील बनाता है, क्योंकि उसके मुख्य तेल क्षेत्र ईरान के काफी करीब हैं. ईरान वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को भी निशाना बना रहा है. जहां से दुनिया की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा गुजरता है.
वैकल्पिक मार्ग और ईरान की चेतावनी
सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए अरामको अब होर्मुज के बजाय लाल सागर मार्ग का उपयोग करने पर विचार कर रही है. हालांकि ईरान ने चेतावनी दी है कि यह वैकल्पिक समुद्री रास्ता केवल चीनी जहाजों के लिए ही खुला रहेगा. ऐसे में अन्य देशों को आपूर्ति करना सऊदी अरब के लिए एक जटिल कूटनीतिक और सुरक्षा चुनौती बन गया है. ऊर्जा के इन प्रमुख मार्गों पर नियंत्रण की जंग अब वैश्विक चिंता का विषय बन चुकी है.
तेल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़त
क्षेत्रीय युद्ध की संभावना ने कच्चे तेल के दामों में जबरदस्त तेजी ला दी है. बुधवार को ब्रेंट क्रूड 1.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 82.53 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया. यह आंकड़ा जनवरी 2025 के बाद सबसे अधिक है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हमलों का यह सिलसिला जारी रहा, तो आपूर्ति की कमी के डर से कीमतें और बढ़ सकती हैं. यह स्थिति आने वाले हफ्तों में वैश्विक महंगाई को भी बढ़ावा दे सकती है.
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