अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के सुरक्षित परिसर को निशाना बनाया गया. इस हमले में खामेनेई की मौत की आशंका जताई जा रही है वहीं दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि हमले के समय खामेनेई वहां मौजूद नहीं थे, इसलिए वे सुरक्षित बच गए. शुरुआती हमलों में उनके दफ्तर और आसपास के इलाकों को निशाना बनाया गया.
हमले के बाद सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में परिसर के भीतर भारी नुकसान और धुएं का गुबार उठता दिखाई दे रहा है. कई इमारतों के क्षतिग्रस्त होने के संकेत मिले हैं, जिससे हमले की तीव्रता का अंदाजा लगाया जा रहा है.
The first known satellite image of Ayatollah Ali Khamenei’s compound in #Tehran shows several buildings destroyed. current whereabouts of Iran’s supreme leader are unknown.
— Mayank Tiwari (@imayanktiwari) February 28, 2026
compound is generally used as his official residence.#Iran #IranRevoIution2026 #MiddleEastConflict pic.twitter.com/d4wzwHmQIw
रिपोर्टों के अनुसार इस संयुक्त हमले में ईरान की सैन्य साइट्स और मिसाइल उत्पादन केंद्रों को भी निशाना बनाया गया. ईरानी नेतृत्व से जुड़े क्षेत्रों पर हमले के कारण यह कार्रवाई केवल सैन्य नहीं बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक संदेश देने वाली मानी जा रही है.
कुछ सूत्रों का दावा है कि इस हमले में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के कई वरिष्ठ कमांडर और अधिकारी मारे गए, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान में बड़ा सैन्य अभियान जारी है और यह आगे भी चलता रहेगा. उन्होंने ईरानी सुरक्षा बलों से हथियार डालने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि विरोध करने पर गंभीर परिणाम होंगे. ट्रंप ने ईरान की जनता से भी अपने शासन के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया और कहा कि यह उनके लिए व्यवस्था बदलने का अवसर हो सकता है.
हमलों के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी और पूरे मध्य पूर्व में इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए. संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कतर में विस्फोटों की खबरें सामने आईं.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई को “अपराधी सैन्य हमला” बताया और कहा कि यह उस समय किया गया जब कूटनीतिक बातचीत जारी थी. मंत्रालय ने कहा कि अब देश की रक्षा के लिए कड़ा जवाब दिया जाएगा.
सुप्रीम लीडर के परिसर पर हमला और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने मध्य पूर्व को बड़े संघर्ष के मुहाने पर ला खड़ा किया है. दोनों पक्षों के सख्त रुख और लगातार सैन्य गतिविधियों से क्षेत्रीय युद्ध की आशंका और गहरी हो गई है. दुनिया भर के देश स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.