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India Daily

ट्रंप के ‘पेपर टाइगर’ बयान पर रूस का जवाब, कहा, यूक्रेन से युद्ध को लेकर किया बड़ा ऐलान

Russia-Ukraine War: मॉस्को के क्रेमलिन ने बुधवार को साफ कर दिया कि रूस यूक्रेन में अपने सैन्य अभियान को किसी भी हाल में जारी रखेगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को 'पेपर टाइगर' करार दिया और कहा कि यूक्रेन अपना खोया हुआ इलाका वापस हासिल कर सकता है.

Anubhaw Mani Tripathi
ट्रंप के ‘पेपर टाइगर’ बयान पर रूस का जवाब, कहा, यूक्रेन से युद्ध को लेकर किया बड़ा ऐलान
Courtesy: X/ @bluhue123

Russia-Ukraine War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और चीन रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के प्रमुख फंडर हैं. यही नहीं उन्होंने यूरोप व नाटो देशों पर भी रूस से गैस खरीदने के लिए जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इस रक्तपात को रोकने के लिए अमेरिका और भयंकर टैरिफ लगाने के लिए पूरी तरह से तैयार है.

रूस को 'पेपर टाइगर' करार दिया

मॉस्को के क्रेमलिन ने बुधवार को साफ कर दिया कि रूस यूक्रेन में अपने सैन्य अभियान को किसी भी हाल में जारी रखेगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को 'पेपर टाइगर' करार दिया और कहा कि यूक्रेन अपना खोया हुआ इलाका वापस हासिल कर सकता है.

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने एक रूसी अखबार को दिए रेडियो इंटरव्यू में कहा, “हम अपने विशेष सैन्य अभियान को जारी रख रहे हैं ताकि अपने हितों की रक्षा कर सकें और निर्धारित लक्ष्यों को हासिल कर सकें. यह सिर्फ वर्तमान के लिए नहीं बल्कि हमारे देश के भविष्य और आने वाली कई पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए भी है. इसलिए हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है.”

अमेरिका-रूस संबंधों पर ठंडापन

इस दौरान ट्रंप के आर्थिक संकट वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पेस्कोव ने माना कि रूस की अर्थव्यवस्था कई वर्षों की तेज़ वृद्धि के बाद अब चुनौतियों का सामना कर रही है. उन्होंने कहा, “रूस अपनी मैक्ट्रोइकोनॉमिक स्थिरता बनाए हुए है. हां, अलग-अलग क्षेत्रों में दिक्कतें और दबाव हैं, लेकिन हम स्थिति को संभाल रहे हैं.”

पेस्कोव ने अमेरिका और रूस के रिश्तों में सुधार की उम्मीदों को भी नाकाम बताया. उन्होंने कहा कि जनवरी में ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद रिश्तों में जो सुधार की संभावना जताई जा रही थी, वह लगभग न के बराबर है. उनके अनुसार, “यह प्रक्रिया बेहद धीमी है, और प्रगति लगभग शून्य रही है.”