नई दिल्ली: दुनिया इस समय कई बड़े संघर्षों से गुजर रही है. एक तरफ रूस-यूक्रेन युद्ध चल रहा है. वहीं, मध्य-पूर्व में तनाव बना हुआ है. इन सबके बीच भारत के पड़ोस में भी गंभीर स्थिति बनती दिख रही है. अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते लगातार खराब होते जा रहे हैं. दोनों देशों के बीच सीमा और आतंकवाद के मुद्दे को लेकर तनाव बढ़ गया है और हाल के दिनों में हालात टकराव तक पहुंच गए हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, इस तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान का करीबी साझेदार चीन सामने आया है. चीन ने कहा कि वह दोनों देशों के बीच शांति बहाल कराने के लिए बातचीत की पहल करने को तैयार है. चीनी अधिकारियों का मानना है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच स्थिरता जरूरी है, क्योंकि इससे क्षेत्र में शांति बनी रहेगी और आर्थिक परियोजनाओं को भी फायदा होगा.
हालांकि, पाकिस्तान ने चीन के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने साफ कहा है कि वह अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के साथ फिलहाल किसी तरह का कूटनीतिक संपर्क नहीं बढ़ाएगा. पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान की जमीन से काम कर रहे प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को लेकर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. जब तक इस मुद्दे पर स्पष्ट कदम नहीं उठाए जाते, तब तक बातचीत संभव नहीं है.
पाकिस्तान के इस फैसले का असर चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) पर भी पड़ सकता है. यह प्रोजेक्ट चीन की वैश्विक पहल बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का अहम हिस्सा है.
चीन चाहता था कि इस आर्थिक कॉरिडोर को आगे बढ़ाते हुए अफगानिस्तान की राजधानी काबुल तक विस्तारित किया जाए, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण यह योजना फिलहाल अटकती नजर आ रही है.
चीन ने हाल ही में अपने विशेष दूत को काबुल और इस्लामाबाद भेजकर हालात को शांत करने की कोशिश भी की. इसके अलावा चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री से फोन पर बातचीत कर संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की.
चीन का कहना है कि दोनों देशों को जल्द युद्धविराम कर बातचीत के रास्ते समाधान निकालना चाहिए. हालांकि, पाकिस्तान का रुख फिलहाल सख्त बना हुआ है और वह तब तक किसी बातचीत के पक्ष में नहीं दिख रहा जब तक उसकी सुरक्षा चिंताओं का समाधान नहीं होता.