नई दिल्ली: थाईलैंड सरकार ने अमेरिका से आए 284 मीट्रिक टन ई-कचरे की विशाल खेप को वापस भेजने का कड़ा फैसला लिया है. लाएम चबांग बंदरगाह पर जब्त यह कचरा अवैध डंपिंग के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई है. विभाग अब आने वाले अन्य कंटेनरों पर भी पैनी नजर रख रहा है ताकि देश के पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके. थाईलैंड का यह कदम वैश्विक स्तर पर कचरा प्रबंधन और पर्यावरण नियमों के अनुपालन की दिशा में सख्त संदेश देता है.
उप प्रधानमंत्री सुचार्ट चोमक्लिन ने पुष्टि की कि 12 कंटेनरों में भरा लगभग 2,85,000 किलोग्राम ई-कचरा वापस अमेरिका भेजा जाएगा. तस्करों ने खतरनाक कचरे को हैती के धातु स्क्रैप के रूप में दिखाकर सीमा शुल्क विभाग को धोखा देने की कोशिश की थी. विशेष जांच विभाग (DSI) की गहन जांच ने इस धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया. तस्करी के इस पैटर्न को समय रहते पकड़ना थाई अधिकारियों के लिए एक बड़ी तकनीकी और खुफिया उपलब्धि मानी जा रही है.
यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय बेसल कन्वेंशन के नियमों के तहत की जा रही है. बेसल एक्शन नेटवर्क (BAN) ने खुफिया जानकारी दी थी कि इस खेप में भारी मात्रा में खतरनाक प्रिंटेड सर्किट बोर्ड का कचरा मौजूद है. थाईलैंड ने मार्च 2023 में इस संधि की पुष्टि की थी. इसके अनुसार अवैध रूप से भेजे गए कचरे को उसके मूल देश वापस भेजना अनिवार्य है. इस पूरी प्रक्रिया में आने वाला समस्त खर्च निर्यातक देश को ही उठाना होगा.
थाईलैंड लंबे समय से विकसित देशों के डिजिटल कचरे का निशाना रहा है. संयुक्त राष्ट्र (UNODC) के अनुसार 2018 के बाद से यहां अवैध कचरे की डंपिंग में भारी बढ़ोत्तरी देखी गई है. इसे रोकने के लिए थाईलैंड ने 2020 में ई-कचरे के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था. वर्ष 2025 में इन नियमों को और अधिक कड़ा किया गया है. अब अधिकारी समुद्र के रास्ते आ रहे 714 अन्य संदिग्ध कंटेनरों की कड़ी निगरानी कर रहे हैं.
इससे पहले मई 2025 में 'ऑपरेशन कैन ओपनर' के दौरान बैंकॉक पोर्ट पर 238 मीट्रिक टन अमेरिकी ई-कचरा पकड़ा गया था. बार-बार हो रही तस्करी की ये घटनाएं दिखाती हैं कि कुछ देश अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं. थाईलैंड की वर्तमान सतर्कता इस अवैध तस्करी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है. पोर्ट पर तैनात टीमें अब हर संदिग्ध कार्गो की भौतिक और तकनीकी जांच कर रही हैं.