अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूरोप से नहीं डरते, बल्कि वो सिर्फ अमेरिका से डरते हैं. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव चरम पर है और ईरान संकट को लेकर नई बहस छिड़ गई है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने रूस द्वारा कथित तौर पर ईरान को सैटेलाइट डेटा मुहैया कराने के सवाल पर कहा, "मुझे नहीं पता कि ऐसा हो रहा है या नहीं, लेकिन आप यह भी कह सकते हैं कि हम यूक्रेन की मदद कर रहे हैं. यह कहना मुश्किल है कि 'तुम हमें निशाना बना रहे हो, जबकि हम यूक्रेन की मदद कर रहे हैं'.
उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह अमेरिका यूक्रेन को रूसी ठिकानों पर हमले के लिए इंटेलिजेंस मुहैया कराता है, उसी तरह रूस भी ईरान की मदद कर सकता है. यह बयान अमेरिकी रक्षा नीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुले तौर पर दोनों देशों की कार्रवाइयों की तुलना की है.
ट्रंप ने यूरोपीय नेताओं पर भी हमला बोला. उन्होंने कहा कि पुतिन यूरोप से इसलिए नहीं डरते क्योंकि यूरोपीय देश कमजोर नेतृत्व वाले हैं और वे अपना फैसला खुद नहीं ले पाते. इस बीच, उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की पर शांति समझौता करने का दबाव बढ़ा दिया है. एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था, "जेलेंस्की को डील कर लेनी चाहिए क्योंकि पुतिन डील करने को तैयार हैं". क्रेमलिन ने भी ट्रंप के इस बयान का स्वागत किया था. क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि ट्रंप के बयान से साफ है कि यूक्रेन ही शांति वार्ता में सबसे बड़ी बाधा है.
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में रूसी तेल पर से कुछ प्रतिबंध हटाने का फैसला किया है, ताकि ईरान युद्ध के कारण बढ़ी तेल की कीमतों पर काबू पाया जा सके. इस फैसले से यूरोपीय देश नाराज हैं. जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने कहा है कि इससे पुतिन की युद्ध क्षमता को बढ़ावा मिलेगा. फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा, "तेल की कीमतें बढ़ने के बहाने रूस के खिलाफ अपना रुख नहीं बदलना चाहिए". वहीं जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने इसे 'पुतिन के युद्ध कोष को भरने' वाला कदम बताया.
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप रूस के साथ बड़ा सौदा करना चाहते हैं. वे यूक्रेन युद्ध खत्म करने और रूस के साथ आर्थिक संबंध फिर से शुरू करने की कोशिश में हैं. पिछले साल अगस्त में अलास्का में ट्रंप-पुतिन शिखर सम्मेलन भी हुआ था.