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अमेरिकी हाउस में रूस सैंक्शन बिल ने पार की पहली बाधा, लागू होते ही क्या भारत पर तुरंत लग जाएगा 100% टैरिफ?

रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिका में एक बार फिर टैरिफ का खतरा बढ़ गया है. अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों वाले विधेयक को 214-211 के मामूली अंतर से आगे बढ़ा दिया है.

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Edited By: Shanu Sharma
अमेरिकी हाउस में रूस सैंक्शन बिल ने पार की पहली बाधा, लागू होते ही क्या भारत पर तुरंत लग जाएगा 100% टैरिफ?
Courtesy: AI

लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 ने मंगलवार को अमेरिकी हाउस में महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक बाधा पार कर ली. प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के पक्ष में 214 वोट पड़े, जबकि 211 सांसदों ने इसका विरोध किया. 

ऐसा तब हुआ जब दो डेमोक्रेटिक सांसदों ने अपनी पार्टी के रुख से अलग जाकर प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया. अब हाउस में विधेयक पर अंतिम वोटिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

भारत समेत इन देशों पर लग सकता है शुल्क

विधेयक में राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 फीसदी तक शुल्क लगाने की शक्ति देने का प्रावधान है. हाउस में पेश एक संशोधन में भारत, चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाखस्तान और किर्गिजस्तान को संभावित शुल्क के दायरे में रखने का प्रस्ताव किया गया था. हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि इन देशों पर अपने आप 100 फीसदी टैरिफ लग जाएगा. कानून बनने के बाद भी शुल्क लगाने का निर्णय राष्ट्रपति के अधिकार और आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा.

सीनेट में पहले ही मिल चुकी है मंजूरी

यह विधेयक अगस्त में अमेरिकी सीनेट से 86-11 वोट के साथ पारित हो चुका है. प्रस्ताव में रूस के अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंधों के साथ उसके कथित ‘शैडो फ्लीट’ पर कार्रवाई का प्रावधान भी है. ये वे जहाज हैं जिन पर रूस के तेल व्यापार से जुड़े प्रतिबंधों से बचने में मदद करने के आरोप लगते हैं. अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि रूसी ऊर्जा से होने वाला कारोबार मॉस्को की आर्थिक क्षमता को बनाए रखने में मदद करता है. इसी वजह से रूस के ऊर्जा खरीदारों पर अतिरिक्त दबाव बनाने का प्रावधान विधेयक में शामिल किया गया है.

विरोधियों ने राष्ट्रपति के अधिकार पर उठाए सवाल

विधेयक को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में मतभेद भी सामने आए हैं. डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स समेत कुछ सदस्यों ने राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ अधिकार दिए जाने पर आपत्ति जताई है. हाउस रूल्स कमेटी के रिकॉर्ड के मुताबिक, मीक्स और अन्य सांसदों ने व्यापक सेकेंडरी टैरिफ प्रावधान को हटाने की कोशिश की थी, लेकिन यह प्रयास खारिज हो गया. फिलहाल इसका कोई निश्चित जवाब नहीं है.

हाउस में बिल के आगे बढ़ने से भारत के खिलाफ 100 फीसदी टैरिफ की संभावना जरूर बनी है, लेकिन इसे लागू करने के लिए विधायी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है. हाउस की अंतिम मंजूरी और इसके बाद राष्ट्रपति की भूमिका अहम होगी. इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका ने भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगा दिया है. फिलहाल मामला प्रस्तावित कानून और आगे होने वाली वोटिंग के चरण में है.