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'अल्लाह के लिए चुनाव...’, PoK में भावुक अपील से मचा सियासी भूचाल, आखिर क्यों भड़क उठे कश्मीरी नेता?

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विधानसभा चुनाव से पहले जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने लोगों से चुनाव बहिष्कार की अपील की है. संगठन का दावा है कि मौजूदा चुनावी प्रक्रिया जनता की वास्तविक आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'अल्लाह के लिए चुनाव...’, PoK में भावुक अपील से मचा सियासी भूचाल, आखिर क्यों भड़क उठे कश्मीरी नेता?
Courtesy: social media

नई दिल्ली: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है. जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने चुनाव प्रक्रिया का विरोध करते हुए नागरिकों से मतदान से दूर रहने की अपील की है. संगठन का कहना है कि मौजूदा हालात में चुनाव निष्पक्ष नहीं माने जा सकते.

चुनाव बहिष्कार की अपील

JAAC के प्रमुख नेताओं में शामिल उमर नजीर कश्मीरी ने एक सार्वजनिक सभा में लोगों से चुनावों में हिस्सा न लेने की अपील की. उन्होंने कहा कि मौजूदा चुनावी प्रक्रिया जनता की वास्तविक इच्छाओं को नहीं दर्शाती और इसमें भाग लेने से उन व्यवस्थाओं को समर्थन मिलेगा जिन पर संगठन गंभीर सवाल उठाता रहा है. उन्होंने लोगों से भावनात्मक अंदाज में कहा कि वे वर्तमान परिस्थितियों को समझते हुए चुनावों से दूरी बनाए रखें. उनके बयान के बाद क्षेत्र में चुनाव को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है.

राजनीतिक दलों पर लगाए गंभीर आरोप

अपने संबोधन में उमर नजीर कश्मीरी ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों पर भी तीखे आरोप लगाए. उनका दावा है कि हाल के महीनों में हुए विरोध प्रदर्शनों और हिंसक घटनाओं के लिए मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था जिम्मेदार है. उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में राजनीतिक दलों की भूमिका रही. हालांकि इन आरोपों पर संबंधित राजनीतिक दलों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि

इस वर्ष PoK में महंगाई, बिजली दरों में बढ़ोतरी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे. शुरुआती दौर में शांतिपूर्ण रहे आंदोलन बाद में कई स्थानों पर हिंसक झड़पों में बदल गए. इन घटनाओं में लोगों के घायल होने और कई गिरफ्तारियों की भी खबरें सामने आईं. JAAC लगातार आरोप लगाता रहा है कि जनता की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया और विरोध को दबाने की कोशिश की गई.

चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव

विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए इस बहिष्कार अभियान ने PoK के राजनीतिक माहौल को और संवेदनशील बना दिया है. एक ओर प्रशासन चुनावी तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी ओर विरोधी समूह इसे जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला कदम बता रहे हैं. अब सबकी नजर इस बात पर है कि चुनाव के दौरान मतदाताओं की भागीदारी कितनी रहती है और मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम आगे किस दिशा में बढ़ता है.