नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर ईरान ने अपना रुख साफ कर दिया है. राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भारत के एक निजी मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में कहा कि जलडमरूमध्य को फिर खोलने की दिशा में ईरान और ओमान एक विशेष समुद्री व्यवस्था पर बातचीत कर रहे हैं. हालांकि, तेहरान ने इसके लिए अमेरिका की नाकाबंदी और ईरान पर दबाव खत्म करने की शर्त रखी है. इस रास्ते से ऊर्जा और समुद्री व्यापार जुड़ा होने के कारण भारत समेत कई देशों की नजर इस घटनाक्रम पर है.
पेजेश्कियन ने कहा कि हॉर्मुज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य नियमों के तहत खोलने की दिशा में काम किया जा सकता है. लेकिन इसके लिए अमेरिका को अपनी नाकाबंदी और ईरान के खिलाफ कार्रवाई रोकनी होगी. उन्होंने कहा कि ईरान पर युद्ध के जरिए दबाव बनाने में अमेरिका अपने उद्देश्य हासिल नहीं कर सका और अब आर्थिक तथा समुद्री दबाव का रास्ता अपनाया जा रहा है.
ईरानी राष्ट्रपति ने बताया कि तेहरान ओमान के साथ हॉर्मुज के लिए एक विशेष समुद्री ढांचे पर बातचीत कर रहा है. उनके मुताबिक, अरब देशों के विदेश मंत्री भी ओमान में बैठक कर प्रस्तावित व्यवस्था पर चर्चा करेंगे. इस प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन यानी IMO को भी जानकारी देने की बात कही गई है. हालांकि, ताजा रिपोर्टों के मुताबिक ईरान-ओमान की समझ तत्काल जलडमरूमध्य खोलने का फैसला नहीं है.
पेजेश्कियन ने हॉर्मुज को लेकर ईरान के कदम का बचाव किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की सैन्य तथा आर्थिक कार्रवाई के जवाब में ईरान प्रतिक्रिया दे रहा है. ईरानी राष्ट्रपति ने सवाल उठाया कि अगर अमेरिका क्षेत्र में हथियार ला सकता है और समुद्री रास्तों पर रोक लगा सकता है, तो ईरान से बिना जवाब दिए रहने की उम्मीद क्यों की जाए. उन्होंने कहा कि उनका देश दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है.
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिकी प्रतिबंधों का असर आम लोगों पर पड़ने का दावा किया. उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों की वजह से मरीजों, रोजगार और लोगों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है. पेजेश्कियन ने आरोप लगाया कि सैन्य कार्रवाई से अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाने के बाद अमेरिका आर्थिक दबाव का सहारा ले रहा है. उन्होंने साफ कहा कि इस तरह के दबाव से ईरान को झुकाया नहीं जा सकेगा.
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पश्चिम एशिया का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है और यहां किसी भी लंबे व्यवधान का असर ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है. भारत के लिए भी यह रास्ता अहम है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री कारोबार इससे जुड़े हैं. इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेजेश्कियन के साथ बातचीत में सुरक्षित नौवहन और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा पर जोर दिया था.