कैंसर मूनशॉट इवेंट में शामिल हुए PM मोदी, भारत से 40 मिलियन वैक्सीन डोज का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 10 साल के कार्यकाल में आज 9वीं बार अमेरिका दौरे पर हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी के अमेरिका पहुंचने से चंद घंटे पहले व्हाइट हाउस ने खालिस्तान समर्थकों की मेजबानी की.अमेरिकी सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह सिख एक्टिविस्ट्स को दूसरे देशों के दमन से बचाएंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय अमेरिका दौरे पर हैं. यहां उन्होंने विलमिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज और जापानी पीएम फोमियो किशिदा के साथ क्वाड समिट में शामिल हुए. इस समिट के बाद पीएम मोदी और अन्य क्वाड नेताओं ने कैंसर मूनशॉट कार्यक्रम में हिस्सा लिया. यहां पीएम मोदी ने इंडो-पेसिफिक देशों को 4 करोड़ वैक्सीन मुफ्त देने की घोषणा की है. साथ ही 7 बिलियन डॉलर की कीमत वाले टेस्टिंग किट और डिटेक्टिंग किट देने की घोषणा भी की है.
वहीं क्वाड समिट से पहले पीएम मोदी ने राष्ट्रपति बाइडेन से उनके होमस्टेट डेलावेयर स्थित आवास पर मुलाकात की. इस दौरान और जो बाइडेन ने पीएम मोदी का गले लगाकर स्वागत किया. इसके बाद बाइडेन और पीएम मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई, जो 1 घंटे से ज्यादा समय तक चली.
'जब दुनिया तनाव और संघर्ष से घिरी हुई..'
इस बैठक में पीएम मोदी ने कहा,'हमारी बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब दुनिया तनाव और संघर्ष से घिरी हुई है. ऐसे में क्वाड का साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर मिलकर काम करना संपूर्ण मानवता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. हम किसी के खिलाफ नहीं हैं. हम सभी नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए सम्मान और सभी मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करते हैं. स्वतंत्र, समावेशी और समृद्ध इंडो-पैसिफिक हमारी साझा प्राथमिकता और साझा प्रतिबद्धता है.
'4 करोड़ वैक्सीन डोज देने का किया ऐलान'
कैंसर मूनशॉट कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'रेडियोथेरेपी इलाज और कैपेसिटी बिल्डिंग में भी भारत सहयोग करेगा. मुझे खुशी है कि हिंद-प्रशांत देशों के लिए GAVI और QUAD की पहलों के अंतर्गत भारत से 40 मिलियन वैक्सीन डोज का योगदान दिया जाएगा. ये 4 करोड़ वैक्सीन डोज करोड़ों लोगों के जीवन में आशा की किरणें बनेंगी. जैसा कि आप देख सकते हैं कि जब क्वाड कार्रवाई करता है, तो यह सिर्फ देशों के लिए नहीं होता है, यह लोगों के लिए होता है. यह हमारे मानव-केंद्रित दृष्टिकोण का सच्चा सार है.'