बैंकिंग छोड़ बनीं 'सेक्सुअल इंटेलिजेंस की गॉडमदर', महिलाओं को फ्लर्टिंग सिखाकर कमाए 31.5 करोड़; क्या है सीक्रेट 'X-शेप' फॉर्मूला?
मध्य चीन की झोउ युआन ने 'सेक्सुअल इंटेलिजेंस' कोर्स के माध्यम से ₹31.5 करोड़ का व्यवसाय विकसित किया है. उनके आकर्षक तकनीकों और मनोवैज्ञानिक युक्तियों ने महिला सशक्तिकरण और रूढ़िवादिता के बीच एक वैश्विक बहस छेड़ दी है.
नई दिल्ली: मध्य चीन की 47 वर्षीय उद्यमी झोउ युआन ने रिश्तों को फिर से जीवंत करने के लिए 'सेक्सुअल इंटेलिजेंस' को एक बड़े व्यापार में बदल दिया है. बैंकिंग करियर के बाद ब्यूटी पार्लर और फिर ब्लैक एंड व्हाइट सेक्सुअल इंटेलिजेंस स्कूल की स्थापना कर उन्होंने डिजिटल दुनिया में अपनी धाक जमाई है उनके द्वारा सिखाए जाने वाले हाव-भाव और मनोवैज्ञानिक पैंतरे महिलाओं के प्रति समाज में व्याप्त 'रूढ़िवादी अपेक्षाओं' और 'सशक्तिकरण' के बीच एक बारीक रेखा पर खड़े नजर आते हैं.
झोउ युआन के अनुसार, सेक्सुअल इंटेलिजेंस आकर्षण बढ़ाने के लिए भावनात्मक जागरूकता और व्यवहारिक तकनीकों का एक अनूठा मिश्रण है. वे महिलाओं को अपनी नजरों का 'X-शेप' में उपयोग करना सिखाती हैं ताकि वे कठोर न दिखें. उनके अनुसार, कोमल गतिशीलता गर्माहट और आकर्षण पैदा करती है जो किसी भी शादी को पुनर्जीवित कर सकती है. हालांकि, ऐसी तकनीकें कभी-कभी उन सामाजिक रूढ़ियों को बल देती हैं जो महिलाओं को केवल आकर्षक वस्तु के रूप में देखती हैं.
करोड़ों का राजस्व और डिजिटल विवाद
इस व्यवसाय की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि झोउ ने लगभग 31.5 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया है. उनके ऑनलाइन कोर्स महज 130 रूपये से शुरू होते हैं, जबकि व्यक्तिगत कार्यशालाओं की फीस 11.5 लाख तक जाती है. यद्यपि उनके सोशल मीडिया हैंडल को विवाद के कारण प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन उनके ऑफलाइन कोर्स अभी भी बहुत लोकप्रिय हैं. यह वित्तीय सफलता दर्शाती है कि समाज में रिश्तों को बचाने का दबाव कितना गहरा है.
सामाजिक रूढ़ियां और आलोचना का स्वर झोउ युआन की तकनीकों को लेकर समाज के एक बड़े वर्ग में काफी तीखी आलोचना भी हो रही है. आलोचकों का मानना है कि यह महिलाओं को अपनी गरिमा की कीमत पर पुरुषों की चापलूसी करना सिखाता है. स्रोतों के अनुसार, लैंगिक असमानता और हिंसा की जड़ें अक्सर इन्हीं 'हानिकारक सामाजिक मानदंडों' में छिपी होती हैं. मीडिया दिशानिर्देशों के अनुसार, महिलाओं के लिए 'सही व्यवहार' की रूढ़ियों को बढ़ावा देने वाली कहानियों से रिपोर्टिंग के दौरान बचना चाहिए.
सशक्तिकरण बनाम पारंपरिक भूमिकाएं
झोउ का तर्क है कि वे महिलाओं को अपनी इच्छाओं को अभिव्यक्त करने और प्रभाव पैदा करने की शक्ति दे रही हैं. वे महिलाओं को सलाह देती हैं कि वे अपनी आवाज का सुर ऊंचा करें और काम मांगते समय तारीफ करें. हालांकि, यह दृष्टिकोण महिलाओं को संसाधन और अवसरों तक समान पहुंच देने के बजाय उन्हें भावनात्मक श्रम करने के लिए प्रेरित करता है. स्रोतों के अनुसार, सशक्तिकरण का अर्थ महिलाओं की स्वतंत्र पहचान और आत्मनिर्णय की क्षमता होना चाहिए.
और पढ़ें
- 'अगर शराब रखते हो, तो चिप्स भी रखो,' घर खाली करने के बाद चोर ने लिपस्टिक से लिख दी ये बात
- ग्रेटर नोएडा में थार ने खड़ी कार को मारी जोरदार टक्कर, वीडियो शेयर कर लोग बोले- आनंद महिन्द्रा जी, थार में सींग लगवाए हैं क्या?
- वैलेंटाइन डे पर एक्स पार्टनर को बनाएं 'कॉकरोच', जानें कौन सा चिड़ियाघर दे रहा बदला लेना का मौका