नई दिल्ली: पहलगाम में हुए हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा चलाये गए ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान में हुई तबाही से वहां की हुकूमत भले ही आंख चुरा ले, लेकिन अब पाकिस्तान के अंदर से ही तबाही पर मुहर लगा देनेवाला ऐसा बयान सामने आया है, जिसने पाकिस्तान के झूठ की पोल खोल दी है. दरअसल लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ ने कबूल किया है कि भारत का 'ऑपरेशन सिंदूर' बहुत बड़ा हमला था और इसमें मुरिदके स्थित आतंकी मुख्यालय इस तरह तबाह हो गया, कि अब वो बैठने लायक भी नहीं रहा.
गौरतलब है कि, पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 'ऑपरेशन सिन्दूर' चलाया था, जिसमें पाकिस्तान में स्थित आतंकी कैंप को निशाना बनाते हुए मिसाइल दागे गए थे. भारतीय सेना ने इस बात को लेकर प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी दी थी कि इस कार्रवाई में मुरिदके स्थित आतंकिती संगठन लश्कर ऐ तैयबा के ठिकाने को ध्वस्त किया गया.
हालांकि पाकिस्तानी हुकूमत हमेशा इस बात से इंकार करती रही और जवाबी करवाई में भारत को ही नुकसान पहुंचाने का दंभ भरती रही. इतना ही नहीं, झूठ के रथ पर सवार होकर पाकिस्तानी हुकूमत ने बाकायदा विजय जुलुस भी निकाला था, लेकिन अब जबकि लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ ने कबूल किया है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर में मुरिदके स्थित आतंकी मुख्यालय तबाह हो गया, तो इससे न सिर्फ भारतीय सेना के दावों की पुष्टि होती है, बल्कि पाकिस्तान का झूठ भी बेनकाब होता है.
रऊफ लश्कर का ऑपरेशनल कमांडर रहा है और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकियों की ट्रेनिंग और लॉन्चिंग से जुड़ा रहा है. हमलों के बाद मारे गए आतंकियों की अंतिम नमाज भी उसी ने पढ़ाई थी. ऐसे व्यक्ति की स्वीकारोक्ति इस बात को और गंभीर बना देती है कि मुरिदके में क्या था और वहां क्या नष्ट हुआ?
ऑपरेशन सिंदूर अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था. इस हमले में 26 नागरिकों की जान गई थी. जांच में सामने आया कि हमला लश्कर ने अपने मुखौटा संगठन टीआरएफ के जरिए कराया था. हमलावरों के पास चीनी हथियार और उपकरण थे, जिससे यह संकेत मिला कि आतंकियों की सप्लाई चेन पहले से कहीं अधिक संगठित हो चुकी है.
रऊफ ने न केवल हमले की पुष्टि की, बल्कि यह भी माना कि पाकिस्तान में जिहाद के लिए खुली छूट है. उसने कहा कि राज्य के फैसले के कारण ही आतंकी गतिविधियां संभव हो पाती हैं. साथ ही उसने चीन की तारीफ करते हुए दावा किया कि तनाव के दौरान बीजिंग ने पाकिस्तान को खुफिया मदद दी. उसके बयान में रणनीतिक संदेश भी साफ झलकता है.
रऊफ का यह बयान उस समय आया है, जब भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान पर आतंक को संरक्षण देने का आरोप लगाता रहा है. मुरिदके में इसी साल जनवरी में आतंकियों की पासिंग आउट सेरेमनी हुई थी, जिसमें लश्कर के शीर्ष नेता मौजूद थे. अब उसी जगह के नष्ट होने की स्वीकारोक्ति ने पाकिस्तान के लिए सफाई देना और मुश्किल कर दिया है.