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Pakistan Petrol-Diesel Price: पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर लगी आग, जानें पेट्रोल और डीजल कितने रुपये महंगा?

अगले 15 दिनों में वैश्विक बाजारों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा. यदि तेल की कीमतें स्थिर होती हैं, तो सरकार इस वृद्धि को वापस ले सकती है. फिलहाल, जनता को इस आर्थिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.

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Edited By: Mayank Tiwari
Pakistan Petrol-Diesel Price: पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर लगी आग, जानें पेट्रोल और डीजल कितने रुपये महंगा?
Courtesy: Social Media

पाकिस्तान में आम जनता को एक बार फिर आर्थिक झटका लगा है. जहां शरीफ सरकार ने मंगलवार (1 जुलाई) को पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तत्काल प्रभाव से भारी वृद्धि की घोषणा की है. यह फैसला वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और तेल की कीमतों में उछाल के बीच लिया गया है. आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं.

पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल की कीमत में 8.36 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 10.39 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है. इस वृद्धि के बाद, पेट्रोल की नई कीमत 266.79 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 272.98 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है. यह नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं. हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह वृद्धि अगले 15 दिनों के लिए लागू रहेगी.

वैश्विक तनाव का पाकिस्तान में पड़ा असर

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में यह उछाल वैश्विक परिदृश्य से प्रभावित है. हाल ही में ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों तक चले तनावपूर्ण संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल मचा दी. इस दौरान वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेजी देखी गई, जिसका असर पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देशों पर भी पड़ा है. वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता ने तेल की आपूर्ति और कीमतों को और प्रभावित किया है.

जनता पर बढ़ता बोझ

पाकिस्तान में पेट्रोल कीमतों में इस वृद्धि ने आम जनता की चिंताओं को बढ़ा दिया है. परिवहन लागत और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में संभावित वृद्धि से महंगाई और अधिक बढ़ सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इस बढ़ोतरी के प्रभाव को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.

भविष्य की क्या हैं संभावनाएं

अगले 15 दिनों में वैश्विक बाजारों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा. यदि तेल की कीमतें स्थिर होती हैं, तो सरकार इस वृद्धि को वापस ले सकती है. फिलहाल, जनता को इस आर्थिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.