नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल पैदा कर दी है. इस युद्ध की सबसे बड़ी मार पाकिस्तान पर पड़ी है, जहां पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद के लिए अब तक की सबसे ऊंची कीमत चुकानी पड़ रही है. होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है. पाकिस्तान की सरकारी तेल कंपनी पीएसओ ने अब सरकार से इस बढ़े हुए खर्च की भरपाई करने की गुहार लगाई है ताकि जनता पर महंगाई का बोझ न बढ़े.
पाकिस्तान स्टेट ऑयल (PSO) को डीजल और अन्य ईंधनों की खरीद के लिए बेंचमार्क कीमतों से बहुत अधिक भुगतान करना पड़ रहा है. पहले जहां यह प्रीमियम करीब 12 डॉलर प्रति बैरल था, अब वह बढ़कर 34 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. हाल ही में 'एमटी कालिबान' जहाज से आए डीजल कार्गो के लिए कंपनी को 35.612 डॉलर प्रति बैरल का अतिरिक्त प्रीमियम देना पड़ा है. यह इजाफा पाकिस्तान की चरमराती अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है.
पीएसओ ने तेल नियामक संस्था ओगरा (OGRA) को पत्र लिखकर आगाह किया है कि इस अतिरिक्त खर्च का बोझ सीधे आम नागरिकों पर नहीं डाला जाना चाहिए. कंपनी चाहती है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा करने के बजाय सरकार खुद इस भारी प्रीमियम का भुगतान करे. पाकिस्तान के लिए इस समय हाई-स्पीड डीजल का सबसे बड़ा आयातक पीएसओ ही है, इसलिए कंपनी का तर्क है कि उसे इस नुकसान की भरपाई मिलनी चाहिए ताकि बाजार में सप्लाई बनी रहे.
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जो खाड़ी देशों से होने वाली तेल और गैस सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है. पाकिस्तान अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है और वह इस रास्ते पर बहुत अधिक निर्भर है. कतर से आने वाली एलएनजी और कुवैत से आने वाला डीजल इसी मार्ग से पाकिस्तान पहुंचता था. इस समुद्री रास्ते की बंदी ने पाकिस्तान के सामने ऊर्जा सुरक्षा का बड़ा संकट पैदा कर दिया है.
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में प्रति 10 डॉलर की वृद्धि से पाकिस्तान का आयात बिल 2 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है. पहले से ही विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह स्थिति बेहद घातक है. ईंधन की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ेगा, जिससे देश में महंगाई का एक नया दौर शुरू होने की आशंका जताई जा रही है.
संकट की इस घड़ी में शहबाज शरीफ सरकार अब ऊर्जा के लिए वैकल्पिक मार्गों की तलाश में जुटी है. पाकिस्तान अब सऊदी अरब के लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह से तेल आयात करने की संभावनाओं को खंगाल रहा है. इसके जरिए वह होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है. हालांकि, ये वैकल्पिक रास्ते ढूंढना और लागू करना एक जटिल प्रक्रिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक युद्ध शांत नहीं होता, पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलें कम नहीं होने वाली हैं.