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ट्रंप की गिरी साख! 62% अमेरिकी स्वभाव और कामकाज से नाखुश, अपनी ही पार्टी में बगावत!

अमेरिका में नए सर्वे के अनुसार डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता गिर रही है. 62% लोग उनके कामकाज से नाखुश हैं, जबकि पार्टी के भीतर भी मतभेद बढ़े हैं, जिससे उनकी नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
ट्रंप की गिरी साख! 62% अमेरिकी स्वभाव और कामकाज से नाखुश, अपनी ही पार्टी में बगावत!
Courtesy: pintrest

नई दिल्ली: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर जनता की राय बदलती नजर आ रही है. हालिया सर्वे में उनकी कार्यशैली, फैसलों और व्यवहार पर गंभीर सवाल उठे हैं. बड़ी संख्या में लोग उनके नेतृत्व से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं. खास बात यह है कि यह असंतोष केवल विपक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी अपनी पार्टी के भीतर भी मतभेद सामने आ रहे हैं. ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में यह असंतोष राजनीतिक असर डाल सकता है.

घटती लोकप्रियता और बढ़ती नाराजगी

हाल में हुए जनमत सर्वे में सामने आया है कि बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक राष्ट्रपति के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं. आंकड़ों के मुताबिक करीब 62 प्रतिशत लोगों ने उनके प्रदर्शन को नकारात्मक बताया है. वहीं केवल 36 प्रतिशत लोग ही उनके काम से संतुष्ट हैं. यह स्थिति उनके लिए चिंता का विषय मानी जा रही है, क्योंकि यह उनके कार्यकाल के सबसे कमजोर दौरों में से एक माना जा रहा है. खासकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और घरेलू नीतियों को लेकर लोगों में असहमति बढ़ती दिख रही है.

पार्टी के भीतर भी मतभेद गहराए

इस सर्वे की सबसे अहम बात यह है कि ट्रंप की अपनी पार्टी के भीतर भी एकराय नहीं है. कई समर्थक उनके स्वभाव और फैसलों को लेकर असहज नजर आ रहे हैं. कुछ लोग उनके आक्रामक रवैये को लेकर चिंता जता रहे हैं, जबकि अन्य इसे उनकी ताकत मानते हैं. पार्टी के भीतर यह विभाजन भविष्य की राजनीति को प्रभावित कर सकता है. इससे यह संकेत मिलता है कि नेतृत्व को लेकर अंदरूनी असंतोष भी धीरे-धीरे सामने आ रहा है.

विदेश नीति पर उठे सवाल

ट्रंप के कई अंतरराष्ट्रीय फैसलों को लेकर भी लोगों में नाराजगी देखी गई है. खासकर ईरान से जुड़े मुद्दों और सैन्य कार्रवाई को लेकर समर्थन सीमित है. बहुत कम लोगों ने इन फैसलों को सही ठहराया है. इसके अलावा, वैश्विक मंच पर उनके बयानों और रुख को लेकर भी आलोचना हो रही है. इससे अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे फैसलों का सीधा असर घरेलू समर्थन पर भी पड़ता है.

आर्थिक मुद्दों ने बढ़ाई चुनौती

देश के भीतर बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत भी एक बड़ा कारण बनकर उभरी है. सर्वे में यह भी सामने आया कि आर्थिक मामलों में उनकी रेटिंग काफी नीचे रही है. लोगों को लगता है कि उनकी नीतियां रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने में सफल नहीं हो रही हैं. यही वजह है कि जनता का भरोसा कमजोर होता दिख रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति आने वाले चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है.