नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की सेना और उसके मीडिया विंग का रवैया लगातार सवालों के घेरे में है. इस बार पाकिस्तान सेना के डीजी आईएसपीआर लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस चर्चा का विषय बन गई है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके बयान और अंदाज को सोशल मीडिया पर जोकर जैसी हरकत बताया जा रहा है.
हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीजी आईएसपीआर ने भारत को लेकर बयान देते हुए कहा कि दाएं से आओ, बाएं से आओ, ऊपर से आओ या नीचे से आओ. अगर मजा न करा दिया तो पैसे वापस. इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी जमकर आलोचना हो रही है. लोग इसे एक सैन्य अधिकारी की भाषा के बजाय मसखरे जैसी टिप्पणी बता रहे हैं.
What type of example Aaaaamd force is using?
— Lala (@FabulasGuy) January 6, 2026
“Ek Baar maza naa kara diaa to paise wapas” 🤣 pic.twitter.com/FcRw8A629b
आमतौर पर सेनाओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस गंभीर और औपचारिक होती हैं. इनमें नीति, सुरक्षा स्थिति और सैन्य तैयारियों पर बात की जाती है लेकिन इस बार पाकिस्तान सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैन्य शिष्टाचार की जगह ताना मारने वाली भाषा देखने को मिली. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह आत्मविश्वास नहीं बल्कि दबाव और असुरक्षा का संकेत है.
डीजी आईएसपीआर ने इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान को ऊपर वाले का तोहफा बताते हुए कहा कि देश में बहुत बरकत है. उन्होंने यह भी कहा कि 2026 कैसा होगा यह हमारे फैसलों पर निर्भर करता है. भारत को दुश्मन बताते हुए उन्होंने कहा कि आपकी तकदीर हमारे हाथ में है. इस बयान को भी भड़काऊ और गैर जिम्मेदाराना बताया जा रहा है.
सबसे विवादित बयान तब आया जब अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि पाकिस्तानी नागरिकों को सजा देने और मारने का अधिकार केवल पाकिस्तान की रियासत को है. उन्होंने कहा कि हमने अपने ही नागरिकों को मारा और यह हमारा अधिकार है. इस बयान के बाद मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
इससे पहले भी डीजी आईएसपीआर विवादों में रहे हैं. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महिला पत्रकार को आंख मारने का मामला भी सामने आ चुका है. अब लगातार ऐसे बयानों से पाकिस्तान सेना की पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचता नजर आ रहा है.