नई दिल्ली: पूर्वी कांगो के गोमा के पास रुबाया खदान क्षेत्र में मंगलवार को बड़ी खदान धंसने की घटना ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान खींचा है. कांगो सरकार ने 200 से ज्यादा मजदूरों की मौत की पुष्टि की है, जबकि मई 2024 से इस इलाके पर काबिज एम23 विद्रोही समूह ने इन आंकड़ों को पूरी तरह नकार दिया है.
यह खदान कोल्टान का प्रमुख केंद्र है, जो मोबाइल फोन, कंप्यूटर और विमान इंजन बनाने में इस्तेमाल होने वाले टैंटलम का मुख्य स्रोत है. घटना क्षेत्र की अस्थिरता और मानवीय संकट को और गहरा कर रही है.
कांगो के खनन मंत्रालय ने बुधवार को बयान जारी कर बताया कि रुबाया की प्रमुख कोल्टान खदान में मंगलवार को बड़े पैमाने पर धंसाई हुई. पिछले महीने भी इसी तरह की घटना में 200 से ज्यादा लोग मारे गए थे. सरकार का कहना है कि इस बार भी मौतों का आंकड़ा 200 के पार पहुंच गया है. खदान मजदूरों के परिवार अब भी अपने लोगों की तलाश में डरे हुए हैं.
रवान्डा समर्थित एम23 के वरिष्ठ नेता फनी काज ने सरकारी आंकड़ों को झूठा करार दिया. उन्होंने कहा कि कोई भूस्खलन नहीं हुआ, बल्कि सैन्य कार्रवाई यानी बमबारी के कारण हादसा हुआ. काज के मुताबिक मौतें सिर्फ पांच हैं और बाकी दावे गलत हैं. एम23 ने मई 2024 से इस क्षेत्र पर नियंत्रण रखा है और खनन से मुनाफा कमा रहा है.
स्थानीय खनिक इब्राहिम तलुसेके ने बताया कि उन्होंने मलबे से 200 से ज्यादा शव निकाले. उन्होंने कहा कि खदान मालिक मौतों की सही संख्या छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. मजदूर डरे हुए हैं, क्योंकि सच्चाई सामने आने से उनकी जान को खतरा हो सकता है. इस घटना ने इलाके में पहले से मौजूद डर को और बढ़ा दिया है.
रुबाया खदान दुनिया के कोल्टान उत्पादन का 15 फीसदी से ज्यादा हिस्सा देती है. 2023 में कांगो ने वैश्विक कोल्टान का करीब 40 प्रतिशत उत्पादन किया. एम23 हर महीने खनन कर और परिवहन कर से लगभग 8 लाख डॉलर कमा रहा है. पूर्वी कांगो में 70 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हैं. जून में अमेरिका की मध्यस्थता से शांति समझौता हुआ था, लेकिन लड़ाई जारी है और बातचीत रुकी हुई है.