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India Daily

'तानाशाही रवैया के साथ समझौता संभव नहीं', शांति वार्ता के फेल होने के बाद मसूद पेजेशकियान का अमेरिका पर हमला

ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता फेल हो गई. जिसके बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अपनी प्रतिक्रिया देते अमेरिका पर हमला बोला है.

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Edited By: Shanu Sharma
'तानाशाही रवैया के साथ समझौता संभव नहीं', शांति वार्ता के फेल होने के बाद मसूद पेजेशकियान का अमेरिका पर हमला
Courtesy: X (@Breakingmyr)

ईरान-अमेरिका के बीच 40 दिनों तक युद्ध चलने के बाद 15 दिनों के लिए अस्थायी युद्ध विराम किया गया था. इस दौरान पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देश इस्लामाबाद में शांति वार्ता करने पहुंचे. हालांकि 21 घंटो तक बातचीत के बाद भी कोई समझौता नहीं हो पाया. जिसके बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने वार्ता की विफलता पर प्रतिक्रिया दी है.

पेजेशकियान ने अमेरिका पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने अमेरिका के साथ शांति वार्ता के विफल होने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोई भी समझौता तभी संभव है जब वाशिंगटन ईरान के वैध अधिकारों का सम्मान करे और निष्पक्ष रुख अपनाए. 

पेजेशकियान ने शेयर किया पोस्ट

पेजेशकियान ने अपनी वार्ता टीम की सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया. जिसमें उन्होंने लिखा कि अगर अमेरिकी सरकार अपनी तानाशाही छोड़ देती है और ईरानी राष्ट्र के अधिकारों का सम्मान करती है, तो किसी समझौते तक पहुंचने के रास्ते जरूर मिल जाएंगे. मैं वार्ता टीम के सदस्यों, खासकर मेरे प्रिय भाई डॉ. ग़ालिबफ़ की सराहना करता हूं. ईरानी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि ईरान अपने संप्रभु अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा.

दोनों देशों के बीच क्यों नहीं बनी बात? 

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने इस वार्ता के विफल होने के बाद पाकिस्तान में मीडिया को अपना तीन मिनट का संबोधन दिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि 21 घंटो तक चली बातचीत में दोनों पक्षों के बीच कई महत्वपूर्ण चर्चाएं हुई, लेकिन कोई समझौता नहीं हो पाया. उन्होंने कहा कि ईरान ने हमारी शर्तों को मानने से मना कर दिया. साथ ही उन्होंने एक बार फिर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि इस समझौते पर बात नहीं बनना ईरान के लिए ज्यादा नुकसानदायक होगा.

सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि इस वार्ता के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और न्यूक्लियर बम को लेकर दोनों देशों के बीच बात नहीं बन पा रही है. ईरान किसी भी हाल में अमेरिका के दबाव में रहने के लिए तैयार नहीं है. ईरान द्वारा लगातार कहा जा रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है. वहीं अमेरिका इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता है.