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धरती का 'पाताल' जहां बसते हैं लोग! यहां डूबना मुश्किल और सांस लेना सबसे आसान, जानिए इस अनोखी जगह का राज

इजरायल में डेड सी के किनारे बसा नेवे जोहर दुनिया की सबसे निचली आबादी वाली बस्ती मानी जाती है. यह समुद्र तल से 400 मीटर से अधिक नीचे स्थित है. यहां वायुमंडलीय दबाव अधिक होने के कारण हवा में सामान्य से 8 से 10 प्रतिशत ज्यादा ऑक्सीजन होती है.

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Edited By: Reepu Kumari
धरती का 'पाताल' जहां बसते हैं लोग! यहां डूबना मुश्किल और सांस लेना सबसे आसान, जानिए इस अनोखी जगह का राज
Courtesy: Grok

नई दिल्ली: क्या आपने कभी ऐसी जगह के बारे में सुना है, जहां लोग समुद्र तल से सैकड़ों मीटर नीचे रहते हों? जहां हवा सामान्य जगहों से अलग महसूस होती हो, सूरज की तेज धूप भी त्वचा को ज्यादा नुकसान न पहुंचाती हो और पानी में उतरने के बाद डूबना लगभग नामुमकिन हो. यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि धरती पर मौजूद एक वास्तविक बस्ती है. इजरायल में डेड सी के किनारे स्थित नेवे जोहर दुनिया की सबसे निचली आबादी वाली बस्ती मानी जाती है. यह समुद्र तल से करीब 400 मीटर से अधिक नीचे बसी है. यहां का प्राकृतिक वातावरण, भौगोलिक बनावट और जीवनशैली इसे दुनिया की सबसे अनोखी जगहों में शामिल करते हैं.

धरती की सबसे निचली आबादी वाली बस्ती

नेवे जोहर इजरायल के दक्षिणी जिले में जॉर्डन रिफ्ट वैली के बीच, हाईवे-31 और हाईवे-90 के जंक्शन के पास स्थित है. यही वह स्थान है जहां इंसान सबसे अधिक गहराई पर स्थायी रूप से रहता है. आसपास रेगिस्तान की पहाड़ियां और डेड सी का फिरोजी पानी इस इलाके को अलग पहचान देते हैं. किनारों पर जमी सफेद नमक की मोटी परतें यहां के प्राकृतिक नजारे को और भी अनोखा बना देती हैं.

हवा में ज्यादा ऑक्सीजन, धूप का असर भी कम

इस क्षेत्र की सबसे बड़ी खासियत इसकी भौगोलिक स्थिति है. अधिक गहराई पर होने के कारण यहां वायुमंडलीय दबाव सामान्य से ज्यादा रहता है. इसी वजह से हवा में लगभग 8 से 10 प्रतिशत अधिक ऑक्सीजन मौजूद होती है, जिससे सांस लेना अपेक्षाकृत आसान महसूस होता है. साथ ही, सूरज की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणें प्राकृतिक रूप से काफी हद तक फिल्टर हो जाती हैं, जिससे सनबर्न का खतरा बेहद कम रहता है.

छोटी आबादी, लेकिन अलग पहचान

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नेवे जोहर की स्थायी आबादी केवल 166 लोगों की है. छोटा होने के बावजूद यह 'तामार रीजनल काउंसिल' का मुख्यालय है. यहां एक प्राथमिक स्कूल, एक स्थानीय संग्रहालय और कुछ रिहायशी मकान हैं. इसकी शुरुआत वर्ष 1964 में डेड सी के पास काम करने वाले फैक्ट्री कर्मचारियों के लिए बनाए गए एक वर्क-कैंप के रूप में हुई थी, जो बाद में स्थायी बस्ती में बदल गया.

शांति पसंद लोगों की पसंदीदा जगह

नेवे जोहर से करीब तीन किलोमीटर दूर 'एन बोकेक' का बड़ा होटल और रिसॉर्ट क्षेत्र है, लेकिन इस बस्ती ने खुद को व्यावसायिक भीड़ से अलग रखा है. यहां कई स्थानीय लोगों ने अपने घरों के हिस्से को छोटे गेस्ट हाउस में बदल दिया है. शांत वातावरण और कम खर्च में डेड सी का अनुभव लेने के लिए यहां बजट यात्री और प्रकृति प्रेमी पहुंचते हैं.

रहना आसान नहीं, फिर भी खास है यह दुनिया

इस बस्ती में गर्मियों के दौरान तापमान अक्सर 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और पूरे साल केवल 40 से 50 मिमी बारिश होती है. गांव में बड़े बाजार, सुपरमार्केट या आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं नहीं हैं. जरूरत का सामान लेने के लिए लोगों को 25 किलोमीटर दूर अराद शहर जाना पड़ता है. वहीं, डेड सी के पानी में करीब 34 प्रतिशत लवणता होने के कारण इसमें डूबना लगभग असंभव होता है. हालांकि, डेड सी का जलस्तर हर साल लगभग एक मीटर घट रहा है, जिससे आसपास सिंकहोल बनने का खतरा भी बढ़ रहा है.