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India Daily

'हम सीजफायर के लिए तैयार', लेबनान पर घातक हमले के बाद बदला इजरायल का रुख, आखिर क्यों बदले नेतन्याहू के तेवर

इजरायल के ताजा हमलों के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान से शांति वार्ता शुरू करने के संकेत दिए हैं, लेकिन संघर्ष, सीजफायर की मांग और क्षेत्रीय तनाव अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'हम सीजफायर के लिए तैयार', लेबनान पर घातक हमले के बाद बदला इजरायल का रुख, आखिर क्यों बदले नेतन्याहू के तेवर
Courtesy: grok

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल और लेबनान के रिश्तों में एक नई हलचल दिखाई दे रही है. हाल ही में हुए भीषण हमलों के बाद, जिनमें सैकड़ों लोगों की जान गई, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शांति वार्ता शुरू करने का संकेत दिया है. हालांकि जमीन पर हालात अब भी तनावपूर्ण हैं और दोनों पक्षों के बीच अविश्वास साफ नजर आता है. ऐसे में यह पहल कितनी सफल होगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

हमलों के बाद शांति की पहल

लेबनान के कई इलाकों- बेरूत, बेका वैली और दक्षिणी हिस्सों में हाल ही में हुए इजरायली हमलों ने भारी तबाही मचाई है. इन हमलों में 300 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है, जिससे हालात और बिगड़ गए. इसी बीच प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने अपनी सरकार को लेबनान के साथ सीधे शांति वार्ता शुरू करने का निर्देश दिया है. उन्होंने इसे लेबनान की ओर से बार-बार बातचीत की इच्छा जताने का जवाब बताया. हालांकि इस घोषणा के बावजूद जमीनी स्तर पर हिंसा जारी है.

बातचीत की शर्तें और अनिश्चितता

इजरायल ने साफ किया है कि प्रस्तावित वार्ता का मुख्य उद्देश्य हिज्बुल्लाह को निरस्त्र करना और दोनों देशों के बीच स्थायी शांति स्थापित करना होगा. दूसरी ओर, लेबनान के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी बातचीत से पहले संघर्ष विराम जरूरी है. अभी तक वार्ता की तारीख और स्थान तय नहीं हुए हैं, जिससे साफ है कि प्रक्रिया शुरुआती दौर में ही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका इस संभावित समझौते में अहम भूमिका निभा सकता है.

हिज्बुल्लाह का कड़ा विरोध

इजरायल के प्रस्ताव पर हिज्बुल्लाह ने कड़ा रुख अपनाया है. संगठन के नेताओं ने साफ कहा है कि वे सीधे वार्ता के पक्ष में नहीं हैं और पहले इजरायली हमलों को रोकना जरूरी है. उनका यह भी कहना है कि लेबनान की जमीन से इजरायली सेना की वापसी और विस्थापित लोगों की वापसी प्राथमिकता होनी चाहिए. इस बीच सीमा पर रॉकेट हमले भी जारी हैं, जिससे हालात और जटिल होते जा रहे हैं.

क्षेत्रीय तनाव और आगे की राह

मध्य पूर्व में यह संघर्ष सिर्फ इजरायल और लेबनान तक सीमित नहीं है. ईरान की भूमिका और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को भी प्रभावित किया है. इजरायल के हालिया हमलों और हिज्बुल्लाह की जवाबी कार्रवाई के बीच लाखों लोग प्रभावित हुए हैं. ऐसे माहौल में शांति वार्ता की पहल उम्मीद जरूर जगाती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए दोनों पक्षों को बड़े समझौते करने होंगे.